manzil zaroori to nahin par ek dilkash raah ho | मंज़िल ज़रूरी तो नहीं पर एक दिलकश राह हो

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मंज़िलज़रूरीतोनहींपरएकदिलकशराहहो
मैंहारकरज़ाफिरबनूँदिलजीतनेकीचाहहो
हरदिलमेंमैंज़िंदारहूँहस्तीअमरमैंकरसकूँ
बे-मिस्लहोमेरीक़लमबे-दाग़वोहमराहहो
मेरेसुख़नकाज़िक्रहोजबमुख़्तसरसाभीकभी
हरशे'रदिलपरजालगेसबकेलबोंपरआहहो
मेरेसभीअल्फ़ाज़होजाएशिफ़ाहरज़ख़्मपर
आबादहोहरग़मभरादिलबसयहीतनख़्वाहहो
हरएकमेराशे'रजैसेआश्तीदरगाहहो
मेरीग़ज़लहोपाकजैसेहरलुग़तअल्लाहहो
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