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Saahir
kyuuñ aa jaate ho seedhe makte par
kyuuñ aa jaate ho seedhe makte par | क्यूँ आ जाते हो सीधे मक़्ते पर
- Saahir
क्यूँ
आ
जाते
हो
सीधे
मक़्ते
पर
पहले
थोड़ा
काम
करो
मतले
पर
हाथों
ने
क्या
जुर्म
किया
इनने
तो
ख़ंजर
मारा
है
दिल
के
कहने
पर
इश्क़
हमारा
ख़त्म
हुआ
आँखों
पे
पकड़े
गए
पहली
चिट्ठी
लिखने
पर
जीते
हुओं
पर
ही
सबकी
आँखें
थी
हारे
हुए
भी
अच्छे
खेले
थे
पर
इश्क़
में
सबकी
जोड़ी
पे
बाजी
है
दाँव
लगाया
है
मैने
इस
रस्ते
पर
मैं
इक
ऐसी
दुनिया
से
हूँ
जिस
में
नहला
भारी
होता
है
दहले
पर
ये
होगा
वो
होगा
क्या
सोचा
था
दुनिया
टिकती
है
अपने
वादे
पर?
याद
रखे
दुनिया
सो
कुछ
यूँँ
करना
आओ
तो
आओ
पहले
दरजे
पर
आँसू
आँखों
तक
आकर
रुकने
हैं
सबने
रोक
लगाई
है
बहने
पर
- Saahir
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तुम
आसमान
पे
जाना
तो
चाँद
से
कहना
जहाँ
पे
हम
हैं
वहाँ
चांदनी
बहुत
कम
है
Shakeel Azmi
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रात
की
भीगी-भीगी
मिट्टी
से
कुछ
उजाले
उगा
रही
होगी
मेरी
दुनिया
में
करके
अँधियारा
वो
दिवाली
मना
रही
होगी
Tanveer Ghazi
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अपना
सब
कुछ
हार
के
लौट
आए
हो
न
मेरे
पास
मैं
तुम्हें
कहता
भी
रहता
था
कि
दुनिया
तेज़
है
Tehzeeb Hafi
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ये
दुनिया
ग़म
तो
देती
है
शरीक-ए-ग़म
नहीं
होती
किसी
के
दूर
जाने
से
मोहब्बत
कम
नहीं
होती
Unknown
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अपनी
दुनिया
भी
चल
पड़े
शायद
इक
रुका
फ़ैसला
किया
जाए
Madan Mohan Danish
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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हम
क्या
करें
अगर
न
तिरी
आरज़ू
करें
दुनिया
में
और
भी
कोई
तेरे
सिवा
है
क्या
Hasrat Mohani
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जिसकी
ख़ातिर
हम
भुला
बैठे
हैं
दुनिया
दोस्तों
से
ही
उन्हें
फ़ुर्सत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
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यक़ीं
मोहकम
अमल
पैहम
मोहब्बत
फ़ातेह-ए-आलम
जिहाद-ए-ज़िंदगानी
में
हैं
ये
मर्दों
की
शमशीरें
Allama Iqbal
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जहाँ
से
जी
न
लगे
तुम
वहीं
बिछड़
जाना
मगर
ख़ुदा
के
लिए
बे-वफ़ाई
न
करना
Munawwar Rana
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उसकी
दीवार
पे
तस्वीर
बना
रक्खी
थी
मैंने
ख़ुद
पाँव
की
ज़ंजीर
बना
रक्खी
थी
लिखते
रहने
से
मेरा
ख़ून
निकल
आया
था
उसने
काग़ज़
पे
भी
शमशीर
बना
रक्खी
थी
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Saahir
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उसकी
अच्छी
बुरी
आदतें
सारी
मालूम
हैं
मुझको
साहिर
चाँदनी
संग
मैं
दाग़
भी
मेरे
महताब
में
देखता
हूँ
Saahir
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क्या-क्या
छीना
है
मुझ
सेे
उसने
बतलाऊँ
नींद,
चैन,
मुस्कान,
ख़ुशी,
वो,
मैं
यानी
सब
Saahir
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दोस्त
से
जब
माँगे
पैसे
मैंने
तब
वो
दे
रहा
था
झाँसा
मुझको
मुफ़लिसी
का
Saahir
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ऊपर
वाले
ने
बस
पैकर
बदले
होते
हैं
दिल,
गुर्दे
तो
सबके
एक
ही
जैसे
होते
हैं
Saahir
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