bojh jab se badh gaya hai zindagi ka | बोझ जब से बढ़ गया है ज़िंदगी का

  - Saahir
बोझजबसेबढ़गयाहैज़िंदगीका
सिलसिलाथमसागयाहैमयकशीका
जोचुराकरशा'इरीख़ुदकीहैंकहते
वोबताएँमुझकोमानीशा'इरीका
देखकरतनख़्वाहमैंयेसोचताहूँ
भावकितनारहगयाहैआदमीका
इश्क़मुझकोरासआताहीनहींपर
मैंछिपाताहूँहुनरआवारगीका
हमअसीरोंकोमोहब्बततीरगीसे
हमनहींचाहेंगेकमरारौशनीका
रोटियोंकीपूजाकरताहूँमैंतबसे
देखाहैजबसेवोमंज़रभुखमरीका
देखकरमुझकोलगेगातुमकोऐसा
होताहैकोईनशाभीबेबसीका
डायरीमेरीकईकरतीअसरहै
येउदासीइकअसरहैडायरीका
सादगीनेतेरीहैजादूचलाया
भावरहताहैज़ियादासादगीका
कामआनाहैनहींमतलबअगरतो
फिरबताओमुझकोमतलबदोस्तीका
तेज़भागावस्लमेंतोफिरहुआयूँँ
हिज्रमेंधी
मेंचलाकांटाघड़ीका
घावभरतेइश्क़केदेखेहैंमैंने
परनहींथाजादूवोचारागरीका
मुझकोसहरामिलगयालैलाकोढूँढों
क़ैसबननाहैमुझेभीइससदीका
काममिलताहैसभीकोज़िंदगीमें
काममुझकोमिलचुकादीवानगीका
आपनेजोसमझाहैअपनीसमझसे
ज़ावियायेतोनहींथाशा'इरीका
वोतवायफ़मानकेक़ाबिलहै'साहिर'
वोभलातोकररहीहैनाकिसीका
  - Saahir
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