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Ritika reet
deep koi vahaañ par jala hi nahin
deep koi vahaañ par jala hi nahin | दीप कोई वहाँ पर जला ही नहीं
- Ritika reet
दीप
कोई
वहाँ
पर
जला
ही
नहीं
उसके
दिल
में
कभी
कोई
था
ही
नहीं
मैने
माँगा
था
रब
से
उसे
इसलिए
वो
मुसलसल
किसी
का
हुआ
ही
नहीं
दो
दिवारों
में
पहले
लड़ाई
हुई
फिर
दरारों
से
दामन
छुटा
ही
नहीं
साथ
मेरे
अजब
हादसा
हो
गया
वो
हुआ
सबका
मेरा
हुआ
ही
नहीं
एक
तस्वीर
से
मैंने
तस्वीर
ली
शख़्स
दो
है
मगर
एक
था
ही
नहीं
- Ritika reet
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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दिल
को
सुकून
रूह
को
आराम
आ
गया
मौत
आ
गई
कि
दोस्त
का
पैग़ाम
आ
गया
Jigar Moradabadi
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मौत
ने
सारी
रात
हमारी
नब्ज़
टटोली
ऐसा
मरने
का
माहौल
बनाया
हमने
घर
से
निकले
चौक
गए
फिर
पार्क
में
बैठे
तन्हाई
को
जगह-जगह
बिखराया
हमने
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Shariq Kaifi
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ज़िन्दगी
इक
हादसा
है
और
कैसा
हादसा
मौत
से
भी
ख़त्म
जिसका
सिलसिला
होता
नहीं
Jigar Moradabadi
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मौत
वो
है
जो
आए
सजदे
में
ज़िन्दगी
वो
जो
बंदगी
हो
जाए
क्या
कहूँ
आप
कितने
प्यारे
हैं
इतने
प्यारे
कि
प्यार
ही
हो
जाए
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Vikram Gaur Vairagi
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ज़िन्दगी
भर
मैं
भले
हर
बात
पर
रोता
रहूँ
मौत
पे
मेरी
मगर
हर
शख़्स
रोना
चाहिए
Ashish Awasthi
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दुनिया
मेरी
बला
जाने
महँगी
है
या
सस्ती
है
मौत
मिले
तो
मुफ़्त
न
लूँ
हस्ती
की
क्या
हस्ती
है
Fani Badayuni
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इक
प्यासे
की
मौत
हुई
है
अब
पानी
को
दुख
होगा
Shadab Javed
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हमारी
मौत
पर
बेशक़
ज़माना
आएगा
रोने
मगर
ज़िंदा
हैं
जब
तक
चैन
से
जीने
नहीं
देगा
Astitwa Ankur
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माँ
की
आग़ोश
में
कल
मौत
की
आग़ोश
में
आज
हम
को
दुनिया
में
ये
दो
वक़्त
सुहाने
से
मिले
Kaif Bhopali
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रहनुमा
है
जो
रूठ
कर
आए
ढूँढते
उनको
दर-ब-दर
आए
आज
सजदे
में
ये
दु'आ
माँगी
याद
भी
उनकी
उम्र-भर
आए
मौत
के
अब
गले
लगेंगे
हम
लौटकर
फिर
न
वो
अगर
आए
लगता
शायद
है
आख़िरी
दिन
ये
घर
को
मेरे
है
चारा-गर
आए
है
गुज़ारिश
ख़ुदास
ये
मेरी
रूठ
कर
ही
मगर
वो
घर
आए
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साथ
उसका
जावेदाना
चाहिए
यानी
मुझको
क़ैद-खाना
चाहिए
कब
तलक
बन
कर
मुसाफ़िर
ही
रहे
अब
हवा
को
भी
ठिकाना
चाहिए
इक
घड़ी
को
भी
नहीं
रुकती
नदी
तुमको
भी
मिलना-मिलाना
चाहिए
हाल
पर
मेरे
कभी
हंँसता
नहीं
आईने
से
दिल
लगाना
चाहिए
हर
किसी
को
बे-दिली
हासिल
नहीं
लुत्फ़
इनका
भी
उठाना
चाहिए
सब
नसीहत
है
यहाँ
सच्ची
मगर
इश्क़
में
मिटना-मिटाना
चाहिए
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सच
कह
रहीं
हूँ
मुझको
मुहब्बत
हुई
नहीं
तस्वीर
ये
वही
है
जो
मुझ
सेे
बनी
नहीं
हर
आदमी
के
दिल
में
कई
राज़
हैं
छिपे
ये
दास्ताँ
वही
जो
किसी
ने
सुनी
नहीं
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यूँँही
न
गुलिस्तान
बयाबान
हुआ
है
लगता
है
यहाँ
से
कोई
तूफ़ान
गया
है
फिर
आपने
माँगी
है
ख़ुशी
मेरी
ख़ुदास
फिर
आपने
कितना
मेरा
नुक़्सान
किया
है
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क्या
मुसीबत
ये
फिर
खड़ी
कर
ली
हिज्र
से
तुमने
दोस्ती
कर
ली
जुगनुओं
को
निकाला
आँगन
से
ज़िन्दगी
फिर
से
बरहमी
कर
ली
है
नशा
ये
नई
मोहब्बत
का
दोस्तों
से
भी
दुश्मनी
कर
ली
तुम
न
आए
तो
हमने
भी
देखो
है
अँधेरों
से
दोस्ती
कर
ली
तुम
सेे
कह
ना
सके
ग़म-ए-दिल
को
हमने
लेकिन
ये
शा'इरी
कर
ली
हादसा
ये
नसीब
ही
में
था
सोचकर
हमने
वापसी
कर
ली
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