main pahle apne ghar ke saare darwaaze lagata hooñ | मैं पहले अपने घर के सारे दरवाज़े लगाता हूँ

  - Rehan Mirza
मैंपहलेअपनेघरकेसारेदरवाज़ेलगाताहूँ
हवाकीदस्तकोंसेरातभरफिरदिललुभाताहूँ
उधरसेख़ुद-कुशीआवाज़देतीहैउदासीको
इधरसेकॉलजबख़ुशियोंकेनंबरपरमिलाताहूँ
कुछऐसेहादसेगुज़रेहैंजिनकोयादरखनेमें
मैंछोटी-छोटीबातोंकोभीअक्सरभूलजाताहूँ
मेरीतुर्बतपेकरअबहंगामाकरोऐसे
ज़राआरामसेबैठोमैंतुमकोसबबताताहूँ
येमेरीबेबसीकाइस्तिआरातोज़रादेखो
मैंजबकुछकहनहींपाताहूँतोबसमुस्कराताहूँ
मैंहीशाइर,मैंहीसा
में',मैंहीहूँसद्र-ए-महफ़िलभी
अकेलाबैठकरमैंख़ुदकोहीग़ज़लेंसुनाताहूँ
  - Rehan Mirza
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