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Ravi 'VEER'
lagta hai meri bagiyaan men gul ka khilna mushkil hai
lagta hai meri bagiyaan men gul ka khilna mushkil hai | लगता है मेरी बगियाँ में गुल का खिलना मुश्किल है
- Ravi 'VEER'
लगता
है
मेरी
बगियाँ
में
गुल
का
खिलना
मुश्किल
है
सारी
दुनियाँ
पा
लूँ
लेकिन
उसका
मिलना
मुश्किल
है
- Ravi 'VEER'
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फोन
भी
आया
तो
शिकवे
के
लिए
फूल
भी
भेजा
तो
मुरझाया
हुआ
रास्ते
की
मुश्किलें
तो
जान
लूँ
आता
होगा
उसका
ठुकराया
हुआ
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Balmohan Pandey
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कभी
फूल
देखती
है
कभी
देखती
है
कलियाँ
मुझे
कर
रही
है
पागल
ये
नज़र
फिसल
फिसल
के
Ajeetendra Aazi Tamaam
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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तसव्वुर
तजरबा
तेवर
तमन्ना
और
तन्हाई
मिलेंगे
फूल
सब
इस
में
ग़ज़ल
गुलदान
है
यारों
पढ़ाई
नौकरी
शादी
फिर
उसके
बाद
दो
बच्चे
हमारी
ज़िन्दगी
इतनी
कहाँ
आसान
है
यारों
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Tanoj Dadhich
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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है
समझना
आपको
तो
शे'र
से
इज़हार
समझें
बात
कहने
को
भला
हम
फूल
क्यूँ
तोड़ा
करेंगे
Ankit Maurya
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ये
शबनमी
लहजा
है
आहिस्ता
ग़ज़ल
पढ़ना
तितली
की
कहानी
है
फूलों
की
ज़बानी
है
Bashir Badr
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किसी
कली
किसी
गुल
में
किसी
चमन
में
नहीं
वो
रंग
है
ही
नहीं
जो
तिरे
बदन
में
नहीं
Farhat Ehsaas
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तितलियाँ
यूँँ
ही
नहीं
बैठ
रही
हैं
तुम
पर
बारहा
तुमको
भी
फूलों
में
गिना
जाता
है
Nasir khan 'Nasir'
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मिरे
ही
वास्ते
लाया
है
दोनो
फूल
और
ख़ंजर
मुझे
ये
देखना
है
बस
वो
पहले
क्या
उठाता
है
Parul Singh "Noor"
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फ़क़त
इज़हार
करना
भी
मेरे
बस
में
नहीं
यारों
वो
ताज़े
फूल
की
शौक़ीन
मैं
सूखा
बगीचा
हूँ
Ravi 'VEER'
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रातें
छत
पर
रोते
रोते
कटती
हैं
सब
कहते
है
देर
सवेरे
उठता
हूँ
Ravi 'VEER'
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जिस
तरह
पत्ते
गिरे
है
शाख़
से
ठीक
वैसे
ही
गिरा
हूँ
यार
मैं
नासमझ
था
मैं
बहुत
पहले
मगर
अब
बहुत
ही
सरफिरा
हूँ
यार
मैं
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Ravi 'VEER'
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करूँँ
क्या
बात
गैरों
की
यहाँ
यारों
मेरा
साया
ही
मुझको
घेर
लेता
है
जिसे
करता
रहा
मैं
याद
हर
लम्हा
वो
मिलता
है
तो
नज़रे
फेर
लेता
है
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Ravi 'VEER'
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हो
मुबारक
आपको
ये
सल्तनत
है
जहाँ
मेरी
नहीं
कुछ
अहमियत
काट
लेंगे
यार
हम
तनहाइयाँ
हो
मुबारक़
आपको
मसरूफ़ियत
मैं
जला
बैठा
जो
दिल
तो
क्या
हुआ
आपने
भी
तो
जला
डाले
हैं
ख़त
दरमियाँ
बढ़ती
गई
जब
दूरियाँ
नफ़रतों
ने
छीन
ली
मासूमियत
काट
लेंगे
यार
हम
तनहाइयाँ
हो
मुबारक़
आपको
मसरूफ़ियत
मैं
सभी
से
पूछ
लेता
हूँ
मगर
हैं
नहीं
पूछे
मेरी
जो
ख़ैरियत
मैं
अकेला
तो
नहीं
था
इश्क़
में
आपने
भी
तो
किए
थे
दस्तख़त
'वीर'
थोड़ा
मन
दुखा
पर
छोड़िए
कह
दिया
कुछ
भी
ग़लत
तो
माज़रत
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Ravi 'VEER'
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