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Ravi 'VEER'
haathon men ab jaam nahin bhaata usko
haathon men ab jaam nahin bhaata usko | हाथों में अब जाम नहीं भाता उसको
- Ravi 'VEER'
हाथों
में
अब
जाम
नहीं
भाता
उसको
जाने
क्यूँँ
ये
काम
नहीं
भाता
उसको
अक्सर
वो
बस
आप
अजी
ही
कहती
है
शायद
मेरा
नाम
नहीं
भाता
उसको
जिसका
बचपन
आँगन
में
गुज़रा
हो
फिर
महलों
का
आराम
नहीं
भाता
उसको
- Ravi 'VEER'
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मैं
तेरी
गोद
में
कैसा
लगा
था
माँ
तेरा
तो
दूसरा
बचपन
हुआ
था
मैं
Rohit tewatia 'Ishq'
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मेरा
बचपन
भी
साथ
ले
आया
गाँव
से
जब
भी
आ
गया
कोई
Kaifi Azmi
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मिरी
जो
शख़्सियत
है
उसको
माँ
ने
ही
तराशा
है
मिरा
बचपन
जहाँ
बीता
था
उस
घर
का
किराया
हूँ
Amaan Pathan
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छोड़
कर
जाने
का
मंज़र
याद
है
हर
सितम
तेरा
सितमगर
याद
है
अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
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Salman Zafar
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तुम
माँग
रहे
हो
मेरे
दिल
से
मेरी
ख़्वाहिश
बच्चा
तो
कभी
अपने
खिलौने
नहीं
देता
Abbas Tabish
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ट्यूशन
में
इक
ऐसी
लड़की
होती
है
जिसकी
कॉपी
सबको
लेनी
होती
है
Dhaval Solanki
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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उड़ने
दो
परिंदों
को
अभी
शोख़
हवा
में
फिर
लौट
के
बचपन
के
ज़माने
नहीं
आते
Bashir Badr
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रो
रहा
था
गोद
में
अम्माँ
की
इक
तिफ़्ल-ए-हसीं
इस
तरह
पलकों
पे
आँसू
हो
रहे
थे
बे-क़रार
जैसे
दीवाली
की
शब
हल्की
हवा
के
सामने
गाँव
की
नीची
मुंडेरों
पर
चराग़ों
की
क़तार
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Ehsan Danish
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बचपन
कितना
प्यारा
था
जब
दिल
को
यक़ीं
आ
जाता
था
मरते
हैं
तो
बन
जाते
हैं
आसमान
के
तारे
लोग
Azra Naqvi
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इश्क़
पर
जब
शे'र
लिखने
बैठता
हूँ
आजकल
मुस्कुराते
लब
मेरे
हैं
आँख
रोती
है
मेरी
Ravi 'VEER'
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सूरत
देखूँ,
आँखें
देखूँ,
ज़ुल्फ़ें
देखूँ,
क्या
देखूँ
कैसे
इन
आँखों
से
मैं
इक
बार
उसे
पूरा
देखूँ
Ravi 'VEER'
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सब
सेे
अच्छा
रह
कर
मैंने
ये
जाना
अपना
ही
अपनों
से
धोखा
करता
है
फूल
तो
ख़ंजर
कुछ
पल
में
हो
जाते
हैं
ख़ंजर
लेकिन
फूल
नहीं
बन
सकता
है
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Ravi 'VEER'
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तेरे
इनकार
का
रत्ती
ज़रा
भी
ग़म
नहीं
मुझको
मगर
मुझको
तेरे
बर्ताव
पर
रोना
बहुत
आया
Ravi 'VEER'
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तेरी
आँखें
दरिया,
जिस्म
शरारा
है
तुझ
पर
ही
तो
जान
मेरा
दिल
हारा
है
तुमको
चाँद
बुलाते
होंगे
सब
लेकिन
मैंने
तेरे
नाम
से
चाँद
पुकारा
है
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Ravi 'VEER'
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