gham pareshaani ki na ab dwaar par dastak rahe | ग़म परेशानी की न अब द्वार पर दस्तक रहे

  - Ravi 'VEER'
ग़मपरेशानीकीअबद्वारपरदस्तकरहे
इल्तिजाइतनीजहाँमेंहरतरफ़रौनकरहे
इश्क़काअंजामकुछऐसारहेमेरेख़ुदा
थामकरबाहेंमेरीवोता-कयामततकरहे
हू-ब-हूहैचाँदकीमानिंदमेराहमसेफ़र
ख़ुदाइसचाँदनीपरइकमेराहीहक़रहे
हैदु'आखुशियाँरहेहरदोदिलोंकेदरमियाँ
इब्तिदा-ए-इश्क़मेंआसाँसदामस्लकरहे
'वीर'अबमसलानहींहैक्याकहेगायेजहाँ
हैज़रूरीबसयहीमहबूबपरशकरहे
  - Ravi 'VEER'
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