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Raunak Karn
muskuraate dard ke saath hai ham lekin
muskuraate dard ke saath hai ham lekin | मुस्कुराते दर्द के साथ है हम लेकिन
- Raunak Karn
मुस्कुराते
दर्द
के
साथ
है
हम
लेकिन
क्यूँ
मेरी
निगाहें
ये
भरी
रहती
है
- Raunak Karn
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सिर्फ़
तस्वीर
रह
गई
बाक़ी
जिस
में
हम
एक
साथ
बैठे
हैं
Ataul Hasan
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एक
काटा
राम
ने
सीता
के
साथ
दूसरा
वनवास
मेरे
नाम
पर
Nasir Shahzad
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मेरे
साथ
हँसने
वालों
शरीक
हों
दुख
में
गर
गुलाब
की
ख़्वाहिश
है
तो
चूम
काँटों
को
Neeraj Neer
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पता
करो
कि
मेरे
साथ
कौन
उतरा
था
ज़मीं
पे
कोई
अकेला
नहीं
उतरता
है
Ahmad Abdullah
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दूर
रहें
तो
याद
बहुत
आती
सब
की
साथ
रहें
तो
घर
में
झगड़े
होते
हैं
Tanoj Dadhich
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मुझे
मालूम
है
माँ
की
दुआएँ
साथ
चलती
हैं
सफ़र
की
मुश्किलों
को
हाथ
मलते
मैंने
देखा
है
Aalok Shrivastav
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मशवरा
हम
भी
तो
दे
सकते
थे
पर
तेरा
साथ
दे
रहे
थे
हम
Vishal Singh Tabish
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आप
के
बाद
हर
घड़ी
हम
ने
आप
के
साथ
ही
गुज़ारी
है
Gulzar
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तुम्हारे
बाद
ये
दुख
भी
तो
सहना
पड़
रहा
है
किसी
के
साथ
मजबूरी
में
रहना
पड़
रहा
है
Ali Zaryoun
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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किसानों
की
यहाँ
पे
बात
कोई
भी
नहीं
सुनता
कहाँ
वो
गाड़ियों
जैसे
ज़मीं
बंजर
बदलता
है
Raunak Karn
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हमें
वो
नींद
में
भी
अब
बुलाती
है
सही
में
याद
भी
उसकी
सताती
है
गया
है
लग
पता
उसकी
सहेली
से
मुझे
अपना
सभी
को
वो
बताती
है
लिखे
थे
जो
ग़ज़ल
उसके
लिए
मैंने
सही
में
वो
ग़ज़ल
सबको
सुनाती
है
रुलाया
है
नहीं
हमको
किसी
ग़म
ने
हमें
जितना
सही
में
वो
रुलाती
है
नहीं
थी
तब
उसे
तकलीफ़
कोई
भी
ख़ुशी
तेरी
यही
बातें
बताती
है
कहाँ
जाए
किसे
बोले
तिरी
बातें
शबिस्ताँ
में
तुझे
क्या
याद
आती
है
उतरता
है
यहाँ
बादल
मगर
फिर
भी
बिना
बादल
नयन
ये
भीग
जाती
है
गया
था
पास
में
उसके
सही
में
कल
सही
में
वो
मुझे
अब
भूल
जाती
है
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Raunak Karn
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किसे
कहते
निकालो
भीड़
से
बाहर
हमें
'रौनक'
सो
करना
क्या
था
ख़ुद
को
और
भी
गुमनाम
कर
डाला
Raunak Karn
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कभी
'रौनक'
लिखा
तो
अपना
नहीं
पढ़ते
तुम्हें
है
यार
पढ़ना
बस
जॉन
की
बातें
Raunak Karn
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बैठने
को
जिस
में
मेरा
करता
है
ये
मन
बहुत
तुम
वो
मध्यम
धूप
के
साए
सी
लगती
हो
मुझे
क्यूँँ
करोगी
तुम
सजावट
तन
पे
या
मन
पे
कोई
सच
कहूँ
तो
तुम
हमेशा
सादा
जचती
हो
मुझे
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Raunak Karn
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