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Ranjan Kumar Barnwal
neend meri ud chuki hai
neend meri ud chuki hai | नींद मेरी उड़ चुकी है
- Ranjan Kumar Barnwal
नींद
मेरी
उड़
चुकी
है
ख़्वाब
तेरे
देखता
हूँ
- Ranjan Kumar Barnwal
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तुम्हारा
ख़्वाब
भी
आए
तो
नींद
पूरी
हो
मैं
सो
तो
जाऊँगा
नींद
आने
की
दवा
लेकर
Swapnil Tiwari
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मैं
जिस
के
साथ
कई
दिन
गुज़ार
आया
हूँ
वो
मेरे
साथ
बसर
रात
क्यूँँ
नहीं
करता
Tehzeeb Hafi
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भूला
नहीं
हूँ
आज
भी
हालात
गाँव
के
हाँ,
शहर
आ
गया
हूँ
मगर
साथ
गाँव
के
दुनिया
में
मेरा
नाम
जो
रोशन
हुआ
अगर
जलने
लगेंगे
बल्ब
भी
हर
रात
गाँव
के
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Tanoj Dadhich
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एक
ही
शख़्स
नहीं
होता
सदा
दिल
का
सुकूँ
एक
करवट
पे
कभी
नींद
नहीं
आ
सकती
Rehan Mirza
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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मैं
सो
रहा
हूँ
तेरे
ख़्वाब
देखने
के
लिए
ये
आरज़ू
है
कि
आँखों
में
रात
रह
जाए
Shakeel Azmi
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फेंक
कर
रात
को
दीवार
पे
मारे
होते
मेरे
हाथों
में
अगर
चाँद
सितारे
होते
Unknown
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जैसे
देखा
हो
आख़िरी
सपना
रात
इतनी
उदास
थीं
आँखें
Siraj Faisal Khan
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जब
चाहें
सो
जाते
थे
हम,
तुम
सेे
बातें
करके
तब
उल्टी
गिनती
गिनने
से
भी
नींद
नहीं
आती
है
अब
इश्क़
मुहब्बत
पर
ग़ालिब
के
शे'र
सुनाए
उसको
जब
पहले
थोड़ा
शरमाई
वो
फिर
बोली
इसका
मतलब?
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Tanoj Dadhich
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ये
मुझे
नींद
में
चलने
की
जो
बीमारी
है
मुझ
को
इक
ख़्वाब-सरा
अपनी
तरफ़
खींचती
है
Shahid Zaki
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कोई
झूठी
गुज़ारिश
क्यूँ
करेगा
अगर
करनी
हो
साज़िश
क्यूँ
करेगा
जिसे
बस
इश्क़
से
मतलब
रहा
है
वो
जिस्मों
की
नुमाइश
क्यूँ
करेगा
उसे
सब
चाँद
कहते
हैं
ज़मीं
पर
कोई
पाने
की
कोशिश
क्यूँ
करेगा
वो
मुझको
जानकर
भी
भूल
बैठा
वो
अब
मेरी
सिफ़ारिश
क्यूँ
करेगा
मुहब्बत
जान
लेगी
जानकर
भी
भला
रंजन
ये
ख़्वाहिश
क्यूँ
करेगा
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Ranjan Kumar Barnwal
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दुनिया
में
ये
हरदिन
हरपल
होता
है
चाहत
में
ही
'आशिक़
सब
कुछ
खोता
है
Ranjan Kumar Barnwal
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ग़मों
में
डूब
कर
ये
सोचता
हूँ
मिली
ख़ुशियाँ
जहाँ
पे
ग़म
वहीं
क्यूँ
Ranjan Kumar Barnwal
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दिल
के
दर
पे
कोई
भी
पहरा
नहीं
है
इसलिए
शायद
कोई
ठहरा
नहीं
है
चीख़
चिल्ला
के,
मना
के
देखता
पर
यार
वो
बे-रहम
है,
बहरा
नहीं
है
मौत
आती
क्यूँ
नहीं
इस
हिज्र
में
अब
हिज्र
का
वो
जख़्म
अब
गहरा
नहीं
है
बस
गुलामी
ही
मिली
है
दिल-लगी
में
दिल
तिरंगे
सा
कभी
फहरा
नहीं
है
सीखता
हूँ
मैं
हवा
से
और
नदी
से
इसलिए
'रंजन'
कभी
ठहरा
नहीं
है
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Ranjan Kumar Barnwal
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उसे
देख
पतझड़
में
मैंने
ये
सोचा
कि
शाख़ों
में
कोई
कली
आ
रही
है
Ranjan Kumar Barnwal
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