मनकोभाताहैहमेशापिंजरेवालाजानवर
येख़बरसुनभागबैठामेरेघरकाजानवर
दर्दजोसमझानहींहै,बेड़ियोंकेघावकी
वोदिखावेकेलिएहीपालरक्खाजानवर
जानपाएँगेनहीं,चाबुकचलानेवालेये
कैसेताँगाखींचताहैइकअकेलाजानवर
बातगरहैवानियतकीग़ौरसेसोचोकभी
फिरतोहरइंसानमें,तुमकोमिलेगाजानवर
जानवर,इंसानकबतकबनसकेगा,क्याकहूँ
धर्मकेभीनामपरजोमारदेताजानवर