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sahil
judaai maut si lagti hai jin ko
judaai maut si lagti hai jin ko | जुदाई मौत सी लगती है जिन को
- sahil
जुदाई
मौत
सी
लगती
है
जिन
को
उन्होंने
भूख
देखी
ही
नहीं
है
- sahil
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तुम्हारी
मौत
मेरी
ज़िंदगी
से
बेहतर
है
तुम
एक
बार
मरे
मैं
तो
बार
बार
मरा
Zubair Ali Tabish
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रूह
मेरी
अब
करेगी
इंतिज़ार
क़ब्र
में
ये
फ़ोन
भी
रख
दीजिए
Tanoj Dadhich
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बरस
रही
है
आँखें
हैं
ये
इनको
बादल
मत
कहना
मौत
हुई
है
दिल
की
मेरे
उसको
घाइल
मत
कहना
जीवन
भर
वो
साथ
रहेगा
प्यार
करेगा
बस
तुमको
मुझको
पागल
कह
देती
थी
उसको
पागल
मत
कहना
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Tanoj Dadhich
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दफ़्न
का
एक
दिन
मुअय्यन
है
मौत
तो
रोज़
का
मुआमिला
है
Rajesh Reddy
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राम
के
हाथों
मौत
लिखी
थी
रावण
की
वरना
तो
बजरंगबली
ही
काफ़ी
थे
Sanskar 'Sanam'
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सब
ने
माना
मरने
वाला
दहशत-गर्द
और
क़ातिल
था
माँ
ने
फिर
भी
क़ब्र
पे
उस
की
राज-दुलारा
लिक्खा
था
Ahmad Salman
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ज़िन्दगी
भर
मैं
भले
हर
बात
पर
रोता
रहूँ
मौत
पे
मेरी
मगर
हर
शख़्स
रोना
चाहिए
Ashish Awasthi
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दो
गज़
सही
मगर
ये
मेरी
मिल्कियत
तो
है
ऐ
मौत
तूने
मुझे
ज़मींदार
कर
दिया
Rahat Indori
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हम
चाहते
थे
मौत
ही
हम
को
जुदा
करे
अफ़्सोस
अपना
साथ
वहाँ
तक
नहीं
हुआ
Waseem Nadir
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मौत
ने
सारी
रात
हमारी
नब्ज़
टटोली
ऐसा
मरने
का
माहौल
बनाया
हमने
घर
से
निकले
चौक
गए
फिर
पार्क
में
बैठे
तन्हाई
को
जगह-जगह
बिखराया
हमने
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Shariq Kaifi
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हैं
दाग़
के
आँगन
में
भी
चर्चे
तुम्हारे
हुस्न
के
ख़ूँ
थूकता
मेरा
हवाला
जौन
के
मिसरे
में
है
sahil
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कुछ
इस
अदास
तुमको
भुलाते
रहे
हैं
हम
इक
नाम
पत्थरों
से
मिटाते
रहे
हैं
हम
sahil
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अजब
जादूगरी
है
मुफ़्लिसी
में
जो
अपना
है
वही
अंजान
हो
जाए
sahil
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उधर
पाने
की
चाहत
है
इधर
है
लुत्फ़
खोने
का
उधर
इश्क़-ए-मजाज़ी
है
इधर
इश्क़-ए-हक़ीक़ी
है
sahil
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वो
काँटा
तो
दिल
से
निकल
भी
गया
दुबारा
ये
दिल
फिर
मचल
भी
गया
दिखाने
लगी
है
मुहब्बत
असर
ये
पत्थर
तो
देखो
पिघल
भी
गया
सताता
रहा
जो
मुसलसल
मुझे
मिरे
साथ
ही
वो
ख़लल
भी
गया
निशाने
पे
था
तब
झुका
ही
नहीं
अभी
तो
निशाना
बदल
भी
गया
जफ़ा
में
भी
की
उसने
एहसान
ही
मिरे
ख़्वाब
सारे
कुचल
भी
गया
गया
वो
तो
मेरी
गई
बंदगी
मियाँ
सूद
छोड़ो
असल
भी
गया
गुज़रते
ही
वालिद
के
साहिल
मियाँ
जली
रस्सी
रस्सी
का
बल
भी
गया
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sahil
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