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sahil
isliye she'r muhabbat pe nahin kahtaa hooñ
isliye she'r muhabbat pe nahin kahtaa hooñ | इसलिए शे'र मुहब्बत पे नहीं कहता हूँ
- sahil
इसलिए
शे'र
मुहब्बत
पे
नहीं
कहता
हूँ
बेवुज़ू
भी
तो
मिरे
शे'र
सुने
जाते
हैं
- sahil
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दीवार
है
दुनिया
इसे
राहों
से
हटा
दे
हर
रस्म-ए-मोहब्बत
को
मिटाने
के
लिए
आ
Hasrat Jaipuri
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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जब
चाहें
सो
जाते
थे
हम,
तुम
सेे
बातें
करके
तब
उल्टी
गिनती
गिनने
से
भी
नींद
नहीं
आती
है
अब
इश्क़
मुहब्बत
पर
ग़ालिब
के
शे'र
सुनाए
उसको
जब
पहले
थोड़ा
शरमाई
वो
फिर
बोली
इसका
मतलब?
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Tanoj Dadhich
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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मैं
चाहता
हूँ
मोहब्बत
मेरा
वो
हाल
करे
कि
ख़्वाब
में
भी
दोबारा
कभी
मजाल
न
हो
Jawwad Sheikh
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किसी
ने
प्यार
जताया
जता
के
छोड़
दिया
हवा
में
मुझको
उठाया
उठा
के
छोड़
दिया
किसे
सिखा
रहे
हो
इश्क़
तुम
नए
लड़के
ये
राग
हमने
मियाँ
गा
बजा
के
छोड़
दिया
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Vishnu virat
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नई
नस्लें
समझ
पाएँ
मुहब्बत
के
मआनी
हमें
इस
वास्ते
भी
शा'इरी
करनी
पड़ेगी
Dipendra Singh 'Raaz'
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कोई
तो
पूछे
मोहब्बत
के
इन
फ़रिश्तों
से
वफ़ा
का
शौक़
ये
बिस्तर
पे
क्यूँ
उतर
आया
Harsh saxena
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हासिल
नहीं
हुआ
है
मोहब्बत
में
कुछ
मगर
इतना
तो
है
कि
ख़ाक
उड़ाना
तो
आ
गया
Amaan Haider
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इश्क़
का
था
खेल
केवल
दौड़
का
बन
के
बल्लेबाज़
शामिल
हो
गया
Divy Kamaldhwaj
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उधर
पाने
की
चाहत
है
इधर
है
लुत्फ़
खोने
का
उधर
इश्क़-ए-मजाज़ी
है
इधर
इश्क़-ए-हक़ीक़ी
है
sahil
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बराबर
तंज
कसती
थीं
हवाएँ
दिया
जलता
रहा
बस
मुस्कुरा
कर
sahil
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तिश्नालबी
लिए
ही
मरा
बज़्म-ए-रिंद
में
साक़ी
की
जिसपे
नज़र-ए-इनायत
नहीं
रही
sahil
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वो
काँटा
तो
दिल
से
निकल
भी
गया
दुबारा
ये
दिल
फिर
मचल
भी
गया
दिखाने
लगी
है
मुहब्बत
असर
ये
पत्थर
तो
देखो
पिघल
भी
गया
सताता
रहा
जो
मुसलसल
मुझे
मिरे
साथ
ही
वो
ख़लल
भी
गया
निशाने
पे
था
तब
झुका
ही
नहीं
अभी
तो
निशाना
बदल
भी
गया
जफ़ा
में
भी
की
उसने
एहसान
ही
मिरे
ख़्वाब
सारे
कुचल
भी
गया
गया
वो
तो
मेरी
गई
बंदगी
मियाँ
सूद
छोड़ो
असल
भी
गया
गुज़रते
ही
वालिद
के
साहिल
मियाँ
जली
रस्सी
रस्सी
का
बल
भी
गया
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sahil
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ये
ऐब
है
या
है
सिफ़त
ये
मौत
का
फ़रमान
है
तुम
इश्क़
कहते
हो
जिसे
अंजान
सा
तूफ़ान
है
sahil
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