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Raj Sengar
chaltaa nahin hooñ ab main rastaa dekhkar
chaltaa nahin hooñ ab main rastaa dekhkar | चलता नहीं हूँ अब मैं रस्ता देखकर
- Raj Sengar
चलता
नहीं
हूँ
अब
मैं
रस्ता
देखकर
उसकी
गली
में
रुक
गया
क्या
देखकर
इक
रोज़
उसने
ख़ुद-कुशी
की
बात
की
अब
सहम
जाता
हूँ
मैं
दरिया
देखकर
यूँँ
ही
अकेले
तन्हा
रहने
दो
मुझे
उसको
बुरा
लगता
है
अच्छा
देखकर
डर
है
मुझे
हामी
न
भर
दे
वो
कहीं
आई
है
कल
ही
एक
लड़का
देखकर
- Raj Sengar
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दर्द
था
और
शा'इरी
थी
और
क्या
था
तेरी
मुझ
सेे
दोस्ती
थी
और
क्या
था
आते
जाते
बस
मुझे
इतना
दिखा
था
उसके
कमरे
में
घड़ी
थी
और
क्या
था
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जो
भी
शामिल
होगा
लश्कर
में
तुम्हारे
डूब
भी
सकता
है
सागर
में
तुम्हारे
पड़
गई
ठंडक
कलेजे
को
बताओ
हो
गए
बर्बाद
चक्कर
में
तुम्हारे
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Raj Sengar
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हमको
ये
दोस्ती
भी
महँगी
पड़ी
चारा-गर
जब
से
देखा
तुझे
बीमार
रहा
करते
हैं
Raj Sengar
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आगे
कभी
हो
जाए
तो
मैं
नहीं
कह
सकता
अब
तक
तो
मोहब्बत
के
आसार
नहीं
दिखते
Raj Sengar
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समर्पित
कर
रहा
हूँ
मैं
तुम्हें
कुछ
गीत
ग़ज़लें
अब
बड़े
ही
प्यार
से
सुनना
मेरे
प्रिय
मीत
ग़ज़लें
अब
Raj Sengar
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