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Raj
baghair aanch ke to roti bhi nahin pakti
baghair aanch ke to roti bhi nahin pakti | बग़ैर आँच के तो रोटी भी नहीं पकती
- Raj
बग़ैर
आँच
के
तो
रोटी
भी
नहीं
पकती
नसीब
वाले
हैं
वो
जिनकी
सिसकियाँ
तू
है
- Raj
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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उस
ने
वा'दा
किया
है
आने
का
रंग
देखो
ग़रीब
ख़ाने
का
Josh Malihabadi
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दफ़्तरी
से
तो
फ़क़त
रोटी
ही
चल
सकती
है
अपनी
साँसों
की
ख़ातिर
ज़रूरी
शा'इरी
करना
है
साहिब
Harsh saxena
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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तुझे
न
आएँगी
मुफ़्लिस
की
मुश्किलात
समझ
मैं
छोटे
लोगों
के
घर
का
बड़ा
हूॅं
बात
समझ
Umair Najmi
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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हज़ारों
साल
नर्गिस
अपनी
बे-नूरी
पे
रोती
है
बड़ी
मुश्किल
से
होता
है
चमन
में
दीदा-वर
पैदा
Allama Iqbal
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मुफ़लिसी
थी
और
हम
थे
घर
के
इकलौते
चराग़
वरना
ऐसी
रौशनी
करते
कि
दुनिया
देखती
Kashif Sayyed
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हसीं
ख़्वाबों
को
अपने
साथ
में
ढोती
हुई
आंँखे
बहुत
प्यारी
लगी
हमको
तेरी
सोती
हुई
आंँखे
मोहब्बत
में
ये
दो
क़िस्से
सुना
है
रोज़
होते
हैं
कभी
हँसता
हुआ
चेहरा
कभी
रोती
हुई
आंँखे
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Naimish trivedi
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धूप
पड़े
उस
पर
तो
तुम
बादल
बन
जाना
अब
वो
मिलने
आए
तो
उसको
घर
ठहराना।
तुमको
दूर
से
देखते
देखते
गुज़र
रही
है
मर
जाना
पर
किसी
गरीब
के
काम
न
आना।
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Tehzeeb Hafi
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सबने
उसके
चू
में
को
चूमा
है
लेकिन
आख़िर
वाले
शख़्स
ने
थोड़े
को
चूमा
है
उसने
महफ़िल
में
जिस
बच्चे
को
चूमा
था
सबने
महफ़िल
में
उस
बच्चे
को
चूमा
है
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Raj
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बदलना
गर
बुराई
का
सबब
है
तो
अपने
चेहरे
में
कालिख़
लगा
लो
Raj
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ये
जो
लोग
इतनी
उल्फ़त
बरसाते
हैं
इतने
पत्थर
साथ
कहाँ
से
लाते
हैं
Raj
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वो
तारे
गिरने
पे
ख़्वाहिश
करती
है
मैं
तारे
गिरने
की
ख़्वाहिश
करता
हूँ
Raj
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तारीकी
से
जलता
है
दीवारें
इसकी
हैं
मुख़बिर
रात
में
साया
एक
दिए
को
तेल
लगाके
आया
है
Raj
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