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Kaviraj " Madhukar"
tumhaari aankh pe yuñ jam raha kaajal
tumhaari aankh pe yuñ jam raha kaajal | तुम्हारी आँख पे यूँँ जम रहा काजल
- Kaviraj " Madhukar"
तुम्हारी
आँख
पे
यूँँ
जम
रहा
काजल
कि
जैसे
आसमाँ
पे
जम
रहे
बादल
तुम्हीं
को
देखकर
सब
छोड़
आए
हम
तुम्हीं
को
देखकर
हम
हो
गए
पागल
- Kaviraj " Madhukar"
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उसे
पागल
बनाती
फिर
रही
हो
जिसे
शौहर
बनाना
चाहिए
था
Arvind Inaayat
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मेरा
हाथ
पकड़
ले
पागल,
जंगल
है
जितना
भी
रौशन
हो
जंगल,
जंगल
है
Umair Najmi
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कोई
दीवाना
कहता
है
कोई
पागल
समझता
है
मगर
धरती
की
बेचैनी
को
बस
बादल
समझता
है
Kumar Vishwas
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न
तुम्हें
होश
रहे
और
न
मुझे
होश
रहे
इस
क़दर
टूट
के
चाहो
मुझे
पागल
कर
दो
Wasi Shah
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आप
के
मुँह
से
सुनना
अच्छा
लगता
था
पागल
हो
क्या
पागल
ऐसा
नइँ
कहते
Shadab Asghar
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तुमने
जब
से
अपनी
पलकों
पर
रक्खा
कालिख़
को
सब
काजल
काजल
कहते
हैं
इश्क़
में
पागल
ही
तो
होना
होता
है
पागल
हैं
जो
मुझको
पागल
कहते
हैं
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Vishal Bagh
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अपने
दिल
में
बसाओगे
हमको
और
गले
से
लगाओगे
हमको
हम
नहीं
इतने
प्यार
के
क़ाबिल
तुम
तो
पागल
बनाओगे
हमको
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Abrar Kashif
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तुम्हारी
बात
करने
की
अदा
ने
ही
किया
पागल
न
जाने
हाल
क्या
होता,
अगर
तुम
शा'इरी
करती
Tanoj Dadhich
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ये
सोचते
रहना
मुझे
पागल
ही
न
कर
दे
ये
सोचते
रहना
कि
मैं
पागल
तो
नहीं
हूँ
Aamir Azher
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अब
मेरी
बात
ये
अफ़वाह
लगेगी
लेकिन
चाहता
हूँ
मैं
तुम्हें
आज
भी
पागल
की
तरह
Pravin Rai
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बहुत
देखा
दिखा
कोई
नहीं
मुझे
तुम
सेा
मिला
कोई
नहीं
कहा
सबने
मुझे
अपना
मगर
मेरा
दिल
से
हुआ
कोई
नहीं
यहाँ
पर
तो
सभी
करते
वफ़ा
यहाँ
पर
बे़वफा
कोई
नहीं
यही
तुम
मान
लो
तो
ठीक
है
तेरा
मेरेे
सिवा
कोई
नहीं
यही
अब
मानकर
मैं
चल
रहा
सभी
अच्छे
बुरा
कोई
नहीं
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Kaviraj " Madhukar"
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हमारा
पेट
भर
भी
जाए
तब
भी
माँ
हमारी
हमें
दो
चार
रोटी
तो
ज़ियादा
ही
खिलाती
Kaviraj " Madhukar"
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ख़ुदाया
और
क्या
मैं
चाहता
कि
बस
अपना
पता
मैं
चाहता
मुझे
बस
प्यार
हैं
उस
सेे
यहाँ
न
कुछ
उसके
सिवा
मैं
चाहता
जिसे
चाहा
कभी
मैंने
बहुत
उसे
अब
भूलना
मैं
चाहता
तुझी
से
बस
मुझे
वैसा
मिला
कि
जैसा
प्यार
था
मैं
चाहता
दिया
जिसने
मुझे
ये
ज़ख़्म
है
उसी
से
अब
दवा
मैं
चाहता
कि
आँखों
की
ख़ुशी
के
वास्ते
तुझी
को
देखना
मैं
चाहता
उसे
भी
प्यार
हो
मुझ
सेे
बहुत
यहीं
तो
बस
ख़ुदा
मैं
चाहता
तिरे
ही
पास
आना
है
मुझे
तिरा
ही
बस
पता
मैं
चाहता
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Kaviraj " Madhukar"
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बेहद
सोचा
समझा
हमनें
तब
है
तुझको
चाहा
हमनें
जीते
जी
दुनिया
के
अंदर
ख़ुद
को
मरते
देखा
हमनें
ख़ुद
से
तब
तब
दूरी
पाई
जब
जब
तुझको
सोचा
हमनें
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Kaviraj " Madhukar"
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तुम्हीं
से
प्यार
करता
जा
रहा
है
दिल
तुम्हीं
पे
यार
मरता
जा
रहा
है
दिल
कि
जितना
दूर
मुझ
सेे
जा
रहे
हो
तुम
हाँ
उतना
ही
बिखरता
जा
रहा
है
दिल
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