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Kaviraj " Madhukar"
man aaKHir kyuuñ ghabraata hai
man aaKHir kyuuñ ghabraata hai | मन आख़िर क्यूँ घबराता है
- Kaviraj " Madhukar"
मन
आख़िर
क्यूँ
घबराता
है
जो
होना
है
हो
जाता
है
हम
बस
देखते
रह
जाते
हैं
पल
भर
में
सब
खो
जाता
है
- Kaviraj " Madhukar"
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चलो
माना
कि
रोना
मसअले
का
हल
नहीं
लेकिन
करे
भी
क्या
कोई
जब
ख़त्म
हर
उम्मीद
हो
जाए
Bhaskar Shukla
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हर
एक
चौखट
खुली
हुई
थी
हर
इक
दरीचा
खुला
हुआ
था
कि
उसकी
आमद
पे
दर
यहाँ
तक
कि
बेघरों
का
खुला
हुआ
था
ये
तेरी
हम्म
ने
हमें
ही
उलझन
में
डाल
रक्खा
है
वरना
हम
पर
तमाम
साइंस
के
फ़लसफ़ों
का
हर
एक
चिट्ठा
खुला
हुआ
था
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Saad Ahmad
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इश्क़
तिरी
इंतिहा
इश्क़
मिरी
इंतिहा
तू
भी
अभी
ना-तमाम
मैं
भी
अभी
ना-तमाम
Allama Iqbal
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कुछ
इस
तरह
से
गुज़ारी
है
ज़िन्दगी
जैसे
तमाम
उम्र
किसी
दूसरे
के
घर
में
रहा
Ahmad Faraz
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सूरज
लिहाफ़
ओढ़
के
सोया
तमाम
रात
सर्दी
से
इक
परिंदा
दरीचे
में
मर
गया
Athar nasik
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दिल
के
तमाम
ज़ख़्म
तेरी
हाँ
से
भर
गए
जितने
कठिन
थे
रास्ते
वो
सब
गुज़र
गए
Kumar Vishwas
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सोचता
हूँ
कि
उस
की
याद
आख़िर
अब
किसे
रात
भर
जगाती
है
Jaun Elia
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नहीं
है
लब
पे
दिखावे
का
भी
तबस्सुम
अब
हमें
किसी
ने
मुक़म्मल
उदास
कर
दिया
है
Amaan Haider
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अजीब
दर्द
का
रिश्ता
था
सब
के
सब
रोए
शजर
गिरा
तो
परिंदे
तमाम
शब
रोए
Tariq Naeem
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चाँद
सा
मिस्रा
अकेला
है
मिरे
काग़ज़
पर
छत
पे
आ
जाओ
मिरा
शे'र
मुकम्मल
कर
दो
Bashir Badr
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ज़मीं
को
छोड़कर
वो
जा
चुका
पर
अभी
भी
है
दिलों
में
वो
सभी
के
Kaviraj " Madhukar"
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तुम्हें
ही
सोचता
रहता
हूँ
बस
मैं
मुझे
कुछ
और
अब
आता
कहाँ
है
Kaviraj " Madhukar"
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बड़ा
पछता
रहा
हूँ
यार
कैसे
कर
दिया
मैं
ने
बिना
देखे
बिना
समझे
भरोसा
कर
लिया
मैं
ने
Kaviraj " Madhukar"
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रखे
थे
कर्ज़
में
गिरवी
ज़मीं
ज़ेवर
पिताजी
ने
बुरे
हालात
देखे
हैं
ज़माने
भर
पिताजी
ने
कि
जिस
हालात
में
जीना
बड़ा
मुश्किल
लगा
सबको
उसी
हालात
में
देखो
चलाया
घर
पिताजी
ने
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Kaviraj " Madhukar"
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नहीं
अब
तो
नहीं
लगता
कहीं
दिल
जहाँ
पर
तुम
रहो
रहता
वहीं
दिल
कि
जबसे
तुम
हुये
हो
दूर
हम
सेे
किसी
के
साथ
में
लगता
नहीं
दिल
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