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Kaviraj " Madhukar"
ha
ha | हमें सब यार इतना मानते हैं
- Kaviraj " Madhukar"
हमें
सब
यार
इतना
मानते
हैं
हमारा
ग़म
भी
अपना
मानते
हैं
- Kaviraj " Madhukar"
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जिसकी
ख़ातिर
कितनी
रातें
सुलगाई
जिसके
दुख
में
दिल
जाने
क्यूँ
रोता
है
इक
दिन
हम
सेे
पूछ
रही
थी
वो
लड़की
प्यार
में
कोई
पागल
कैसे
होता
है
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Ritesh Rajwada
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उठाओ
कैमरा
तस्वीर
खींच
लो
इन
की
उदास
लोग
कहाँ
रोज़
मुस्कराते
हैं
Malikzada Javed
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तू
भी
कब
मेरे
मुताबिक
मुझे
दुख
दे
पाया
किस
ने
भरना
था
ये
पैमाना
अगर
ख़ाली
था
एक
दुख
ये
कि
तू
मिलने
नहीं
आया
मुझ
सेे
एक
दुख
ये
है
उस
दिन
मेरा
घर
ख़ाली
था
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Tehzeeb Hafi
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कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
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ग़म
के
पीछे
मारे
मारे
फिरना
क्या
ये
दौलत
तो
घर
बैठे
आ
जाती
है
Shakeel Jamali
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और
भी
दुख
हैं
ज़माने
में
मोहब्बत
के
सिवा
राहतें
और
भी
हैं
वस्ल
की
राहत
के
सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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यही
बहुत
है
मिरे
ग़म
में
तुम
शरीक
हुए
मैं
हॅंस
पड़ूँगा
अगर
तुमने
अब
दिलासा
दिया
Imran Aami
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आज
तो
बे-सबब
उदास
है
जी
इश्क़
होता
तो
कोई
बात
भी
थी
Nasir Kazmi
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उदासी
चल
कहीं
चलते
हैं
दोनों
पिएँगे
चाय
और
बातें
करेंगे
Gaurav Singh
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बहुत
से
ग़म
समेट
कर
बनाई
एक
डायरी
चुवाव
देख
रात
भर
बनाई
एक
डायरी
ये
हर्फ़
हर्फ़
लफ़्ज़
लफ़्ज़
क़ब्र
है
वरक़
वरक़
दिल-ए-हज़ीं
से
इस
क़दर
बनाई
एक
डायरी
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Aves Sayyad
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हमारी
ज़िंदगी
का
आशिक़ी
का
नाम
रिमझिम
है
हमें
जो
हो
गई
उस
दिललगी
का
नाम
रिमझिम
है
मैं
जिस
के
प्यार
का
मारा
मुझे
जिस
सेे
मुहब्बत
है
वो
कोई
और
थोड़ी
है
उसी
का
नाम
रिमझिम
है
ग़मों
के
नाम
कितने
हैं
हमें
मालूम
करना
क्या
हमें
मालूम
इतना
है
ख़ुशी
का
नाम
रिमझिम
है
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Kaviraj " Madhukar"
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उसे
लग
जाए
कैसे
भी
लत
हमारी
खु़दाया
बस
यही
हैं
चाहत
हमारी
Kaviraj " Madhukar"
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शायद
बहुत
मजबूर
है
मुझ
सेे
तभी
वो
दूर
है
कैसा
यहाँ
दस्तूर
है
चाहूँ
जिसे
वो
दूर
है
मुझ
में
नहीं
है
पर
मिरी
हर
शा'इरी
में
नूर
है
कोई
मिरा
होगा
नहीं
शायद
यहीं
दस्तूर
है
अब
आशिक़ी
को
छोड़कर
सब
कुछ
मुझे
मंज़ूर
है
जो
है
मुझे
तूने
दिया
वो
ज़ख़्म
तो
नासूर
है
ग़ालिब
कभी
मशहूर
थे
"मधुकर"
अभी
मशहूर
है
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Kaviraj " Madhukar"
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मिरी
इस
ज़िन्दगी
का
आसरा
तुम
मिरी
हिम्मत
मिरा
हो
हौसला
तुम
ज़माना
जो
कहे
कहता
रहे
पर
नहीं
हो
हाँ
नहीं
हो
बे-वफ़ा
तुम
कि
चलती
साथ
में
ख़ुशियाँ
तुम्हारे
अकेले
हो
ख़ुशी
का
क़ाफ़िला
तुम
हमारे
बिन
यहाँ
तुम
कुछ
नहीं
हो
हमारे
साथ
हो
पर
क़ाफ़िला
तुम
तभी
से
रह
रहे
हम
सेे
ख़फ़ा
सब
कि
जबसे
हो
गए
हम
सेे
ख़फ़ा
तुम
तुम्हारा
सोचते
हैं
हम
भला
ही
हमारा
सोचते
हो
क्यूँ
बुरा
तुम
करेगा
कल
बहुत
जो
बे-वफ़ाई
उसी
से
कर
रही
हो
क्यूँ
वफ़ा
तुम
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उसकी
बाँहो
में
ख़ुश
हो
तुम
सच
सच
बतलाना
जानेमन
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