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AMAN RAJ SINHA
vo chahta tha log uski fikr yuñ karte rahen
vo chahta tha log uski fikr yuñ karte rahen | वो चाहता था लोग उसकी फ़िक्र यूँँ करते रहें
- AMAN RAJ SINHA
वो
चाहता
था
लोग
उसकी
फ़िक्र
यूँँ
करते
रहें
उसको
ज़रा
सा
भी
नहीं
मतलब
किसी
के
ग़म
से
है
- AMAN RAJ SINHA
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लबों
में
आ
के
क़ुल्फ़ी
हो
गए
अश'आर
सर्दी
में
ग़ज़ल
कहना
भी
अब
तो
हो
गया
दुश्वार
सर्दी
में
Sarfaraz Shahid
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शब
भर
इक
आवाज़
बनाई
सुब्ह
हुई
तो
चीख़
पड़े
रोज़
का
इक
मामूल
है
अब
तो
ख़्वाब-ज़दा
हम
लोगों
का
Abhishek shukla
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यारो
कुछ
तो
ज़िक्र
करो
तुम
उस
की
क़यामत
बाँहों
का
वो
जो
सिमटते
होंगे
उन
में
वो
तो
मर
जाते
होंगे
Jaun Elia
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किसी
से
छोटी
सी
एक
उम्मीद
बाँध
लीजिए
मोहब्बतों
का
अगर
जनाज़ा
निकालना
है
Shakeel Jamali
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पहले
पानी
को
और
हवा
को
बचाओ
ये
बचा
लो
तो
फिर
ख़ुदा
को
बचाओ
Swapnil Tiwari
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बाग़बाँ
हम
तो
इस
ख़याल
के
हैं
देख
लो
फूल
फूल
तोड़ो
मत
Jaun Elia
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इश्क़
में
तेरे
गँवा
दी
ये
जवानी
जानेमन
हो
गई
दिलचस्प
अपनी
भी
कहानी
जानेमन
Tanoj Dadhich
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सर-ज़मीन-ए-हिंद
पर
अक़्वाम-ए-आलम
के
'फ़िराक़'
क़ाफ़िले
बसते
गए
हिन्दोस्ताँ
बनता
गया
Firaq Gorakhpuri
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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मुझे
रिश्ता
नहीं
मालूम
है
लेकिन
वो
अक्सर
मेरी
आँखों
से
ही
रोती
थी
AMAN RAJ SINHA
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चुराया
है
किसी
ने
मह-जबीं
मुझ
सेे
'इशा
ने
रौशनी
को
हर
लिया
जैसे
AMAN RAJ SINHA
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तुमको
ये
लग
रहा
है
कि
दीवानगी
है
दोस्त
मेरी
ग़ज़ल
नहीं
है
मेरी
ज़िंदगी
है
दोस्त
गिर
जो
गया
नज़र
से
तू
हैरत
नहीं
मुझे
अपना
भी
तू
रहा
नहीं
शर्मिंदगी
है
दोस्त
कहता
था
जो
कभी
मुझे
बदलूँगा
मैं
नहीं
अब
तो
वो
भी
बदल
गया
हैरानगी
है
दोस्त
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AMAN RAJ SINHA
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कहो
मुझ
सेे
बिछड़
कर
भूल
जाओगी
बताओ
भूल
कर
के
क्या
जी
पाओगी
है
इक
दिन
में
तुम्हारी
तो
ये
हालत
सो
बिछड़
कर
तो
यक़ीनन
मर
ही
जाओगी
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AMAN RAJ SINHA
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हम
दोनों
के
ग़म
एक
जैसे
ही
हैं
दोस्त
हम
दोनों
ही
तन्हा
बचे
इस
शहर
में
AMAN RAJ SINHA
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