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Prashant Rao chourase
ishq men barbaad ham jo na hote to
ishq men barbaad ham jo na hote to | इश्क़ में बर्बाद हम जो न होते तो
- Prashant Rao chourase
इश्क़
में
बर्बाद
हम
जो
न
होते
तो
ये
कहानी
ख़ूब-सूरत
नहीं
होती
- Prashant Rao chourase
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पलट
कर
लौट
आने
में
मज़ा
भी
है
मुहब्बत
भी
बुलाकर
देख
लो
शायद
पलट
कर
लौट
आएँ
हम
Gaurav Singh
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वो
जो
पहला
था
अपना
इश्क़
वही
आख़िरी
वारदात
थी
दिल
की
Pooja Bhatia
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सच
बताओ
कि
सच
यही
है
क्या
साँस
लेना
ही
ज़िंदगी
है
क्या
कुछ
नया
काम
कर
नई
लड़की
इश्क़
करना
है
बावली
है
क्या
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Vikram Gaur Vairagi
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जब
चाहें
सो
जाते
थे
हम,
तुम
सेे
बातें
करके
तब
उल्टी
गिनती
गिनने
से
भी
नींद
नहीं
आती
है
अब
इश्क़
मुहब्बत
पर
ग़ालिब
के
शे'र
सुनाए
उसको
जब
पहले
थोड़ा
शरमाई
वो
फिर
बोली
इसका
मतलब?
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Tanoj Dadhich
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माना
के
मोहब्बत
का
छुपाना
है
मोहब्बत
चुपके
से
किसी
रोज़
जताने
के
लिए
आ
Ahmad Faraz
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मैं
चाहता
हूँ
मोहब्बत
मेरा
वो
हाल
करे
कि
ख़्वाब
में
भी
दोबारा
कभी
मजाल
न
हो
Jawwad Sheikh
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इश्क़
के
रंग
में
ऐ
मेरे
यार
रंग
आया
फिर
आज
रंगों
का
तेहवार
रंग
हो
गुलाबी
या
हो
लाल
पीला
हरा
आ
लगा
दूँ
तुझे
भी
मैं
दो
चार
रंग
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Afzal Ali Afzal
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यूँँ
तो
रुस्वाई
ज़हर
है
लेकिन
इश्क़
में
जान
इसी
से
पड़ती
है
Fahmi Badayuni
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हर
मुलाक़ात
पे
सीने
से
लगाने
वाले
कितने
प्यारे
हैं
मुझे
छोड़
के
जाने
वाले
ज़िंदगी
भर
की
मोहब्बत
का
सिला
ले
डूबे
कैसे
नादाँ
थे
तिरे
जान
से
जाने
वाले
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Vipul Kumar
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इश्क़
का
था
खेल
केवल
दौड़
का
बन
के
बल्लेबाज़
शामिल
हो
गया
Divy Kamaldhwaj
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मुझे
पहले
समझ
फिर
कोई
अंदाज़ा
लगा
दोस्त
नहीं
समझा
तो
ख़ुद
के
आगे
आईना
लगा
दोस्त
बड़ी
रफ़्तार
से
निकला
है
मेरे
दिल
से
इक
शख़्स
नहीं
वापस
वो
आने
वाला
दरवाज़ा
लगा
दोस्त
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Prashant Rao chourase
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जो
दिन
में
छटपताए
तो
पिता
का
दर्द
समझे
दो
रुपए
ख़ुद
कमाए
तो
पिता
का
दर्द
समझे
Prashant Rao chourase
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किसी
की
नहीं
तकता
मैं
राह
क्योंकि
किसी
ने
मुझे
ख़त
लिखे
ही
नहीं
Prashant Rao chourase
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है
ग़ज़ल
में
पहले
मतला
और
मक़्ता
बाद
में
यानी
उसका
नाम
पहले
और
मेरा
बाद
में
Prashant Rao chourase
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मैं
कितना
बदनसीब
हूँ
वो
समझा
बस
रक़ीब
हूँ
हुआ
सभी
से
दूर
पर
किसी
के
मैं
क़रीब
हूँ
सुना
दिया
जो
अपना
दर्द
उसे
लगा
सलीब
हूँ
दवा
है
ये
मिरी
ग़ज़ल
मैं
ख़ुद
का
ही
तबीब
हूँ
नहीं
हूँ
जौन
सा
मगर
मैं
भी
बहुत
अजीब
हूँ
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Prashant Rao chourase
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