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Prashant Rao chourase
hamaara haal ham dono ko hai maaloom lekin dost
hamaara haal ham dono ko hai maaloom lekin dost | हमारा हाल हम दोनों को है मालूम लेकिन दोस्त
- Prashant Rao chourase
हमारा
हाल
हम
दोनों
को
है
मालूम
लेकिन
दोस्त
वो
कहती
है
मैं
अच्छी
हूँ
मैं
कहता
हूँ
मैं
अच्छा
हूँ
- Prashant Rao chourase
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इश्क़
हुआ
है
क्या
तुझ
को
भी
तेरा
जो
होगा
सो
होगा
shaan manral
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कमरे
में
सिगरेटों
का
धुआँ
और
तेरी
महक
जैसे
शदीद
धुँध
में
बाग़ों
की
सैर
हो
Umair Najmi
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आए
थे
हँसते
खेलते
मय-ख़ाने
में
'फ़िराक़'
जब
पी
चुके
शराब
तो
संजीदा
हो
गए
Firaq Gorakhpuri
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ये
दाग़
दाग़
उजाला
ये
शब-गज़ीदा
सहर
वो
इंतिज़ार
था
जिस
का
ये
वो
सहर
तो
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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ये
मख़मली
गद्दे
तो
तुझको
ही
मुबारक
हों
ऐ
दोस्त
मुझे
बस
माँ
की
गोद
ही
काफ़ी
है
Harsh saxena
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मैं
कहता
हूँ
"सुनो
लड़की!
मुझे
कुछ
तुम
से
कहना
था"
वो
ऐसे
पूछती
है
फिर
मैं
सब
कुछ
भूल
जाता
हूँ
Shadab Asghar
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कई
शे'र
पढ़
कर
है
ये
बात
जानी
कोई
शे'र
उसके
मुक़ाबिल
नहीं
है
Alankrat Srivastava
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तबक़ों
में
रंग-ओ-नस्ल
के
उलझा
के
रख
दिया
ये
ज़ुल्म
आदमी
ने
किया
आदमी
के
साथ
Bakhtiyar Ziya
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गले
में
उस
के
ख़ुदा
की
अजीब
बरकत
है
वो
बोलता
है
तो
इक
रौशनी
सी
होती
है
Bashir Badr
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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हम
उदास
लड़कों
को
भा
रही
है
तन्हाई
आज
कल
किसी
से
भी
राब्ता
नहीं
दिखता
Prashant Rao chourase
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निशाँ
गर्दन
पे
दे
सकती
थी
तुम
मुझ
को
ज़रूरत
थी
नहीं
ख़ंजर
चलाने
की
Prashant Rao chourase
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कभी
तू
भी
तो
जाँ
मिरा
ख़्याल
कर
मैं
ज़िन्दा
हूँ
या
मर
गया
सवाल
कर
नहीं
हुआ
किसी
का
मैं
मलाल
है
तू
भी
नहीं
हुआ
मिरा
मलाल
कर
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Prashant Rao chourase
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मुझे
पहले
समझ
फिर
कोई
अंदाज़ा
लगा
दोस्त
नहीं
समझा
तो
ख़ुद
के
आगे
आईना
लगा
दोस्त
बड़ी
रफ़्तार
से
निकला
है
मेरे
दिल
से
इक
शख़्स
नहीं
वापस
वो
आने
वाला
दरवाज़ा
लगा
दोस्त
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Prashant Rao chourase
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मैं
कितना
बदनसीब
हूँ
वो
समझा
बस
रक़ीब
हूँ
हुआ
सभी
से
दूर
पर
किसी
के
मैं
क़रीब
हूँ
सुना
दिया
जो
अपना
दर्द
उसे
लगा
सलीब
हूँ
दवा
है
ये
मिरी
ग़ज़ल
मैं
ख़ुद
का
ही
तबीब
हूँ
नहीं
हूँ
जौन
सा
मगर
मैं
भी
बहुत
अजीब
हूँ
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Prashant Rao chourase
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