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Prashant Sitapuri
vo kaksha das ki yaaden vo hin
vo kaksha das ki yaaden vo hin | वो कक्षा दस की यादें वो हिंदी का पहला पेपर
- Prashant Sitapuri
वो
कक्षा
दस
की
यादें
वो
हिंदी
का
पहला
पेपर
वो
लंबी
पटरी
वाली
लड़की
याद
बहुत
आती
है
- Prashant Sitapuri
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ट्यूशन
में
इक
ऐसी
लड़की
होती
है
जिसकी
कॉपी
सबको
लेनी
होती
है
Dhaval Solanki
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लोग
औरत
को
फ़क़त
जिस्म
समझ
लेते
हैं
रुह
भी
होती
है
उस
में
ये
कहाँ
सोचते
हैं
Sahir Ludhianvi
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तो
डर
रहे
हैं
आप
कहीं
हक़
न
माँग
ले
यानी
कि
सबको
खौफ़
है
औरत
के
नाम
से
Abhishar Geeta Shukla
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मैं
कहता
हूँ
"सुनो
लड़की!
मुझे
कुछ
तुम
से
कहना
था"
वो
ऐसे
पूछती
है
फिर
मैं
सब
कुछ
भूल
जाता
हूँ
Shadab Asghar
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हम
सेे
भी
इक
लड़की
मिलने
आती
थी
हम
भी
शाम
को
कैफ़े
जाया
करते
थे
Tanoj Dadhich
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न
कोई
बीन
बजाई
न
टोकरी
खोली
बस
एक
फोन
मिलाने
पे
साँप
बैठा
है
कोई
भी
लड़की
अकेली
नज़र
नहीं
आती
यहाँ
हर
एक
ख़जाने
पे
साँप
बैठा
है
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Muzdum Khan
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तुम
लहराती
सागर
सी
मैं
खालीपन
का
मारा
हूँ
तुम
कामयाब
शहरी
लड़की
मैं
गलियों
का
आवारा
हूँ
Ajay lakhnavi
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दुख
तो
बहुत
मिले
हैं
मोहब्बत
नहीं
मिली
यानी
कि
जिस्म
मिल
गया
औरत
नहीं
मिली
मुझको
पिता
की
आँख
के
आँसू
तो
मिल
गए
मुझको
पिता
से
ज़ब्त
की
आदत
नहीं
मिली
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Abhishar Geeta Shukla
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सियासत
के
चेहरे
पे
रौनक़
नहीं
ये
औरत
हमेशा
की
बीमार
है
Shakeel Jamali
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इक
लड़की
है
जो
इकदम
घर
जैसी
है
वो
बिल्कुल
माँ
जैसी
बातें
करती
है
Siddharth Saaz
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छोड़
चला
जाता
है
नाज़
उठाने
वाला
सो
ज़्यादा
नखरे
भी
ठीक
नहीं
होते
हैं
Prashant Sitapuri
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तेरी
महफिल
से
जैसे
चल
दिए
हम
लगा
यूँँ
अपने
रस्ते
चल
दिए
हम
गिनाने
लग
गए
सब
खूबियां
तो
उठे
हम
और
उठ
के
चल
दिए
हम
अभी
इजहार
की
हिम्मत
नहीं
है
सो
आँखों
के
इशारे
चल
दिए
हम
तू
सारे
दांव
उल्फत
के
चला
था
तेरे
हिस्से
में
धोखे
चल
दिए
हम
रहा
कुछ
साथ
किस्मत
का
मेरे
में
बचे
कुछ
दांव
अच्छे
चल
दिए
हम
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Prashant Sitapuri
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मुझे
मालूम
है
उसने
मुझे
कैसे
पढ़ाया
है
कभी
जब
फीस
भरनी
हो
माँ
ज़ेवर
बेच
देती
थी
Prashant Sitapuri
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सभी
की
कोशिशोँ
से
मेरे
ख़ातिर
उदासी
ढूंढ
कर
लायी
गई
है
Prashant Sitapuri
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अदब
ही
सीखते
हैं
हम
अदब
ही
काम
आएगा
दु'आ
जब
माँ
करेगी
तो
हमारा
नाम
आएगा
ज़माने
की
कोई
दौलत
नहीं
है
माँ
से
बढ़कर
तो
संभाले
रख
यही
दौलत
यहीं
आराम
आएगा
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Prashant Sitapuri
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