in aankhoñ men basaayi is nami ka dukh samjhte hain | इन आँखों में बसायी इस नमी का दुख समझते हैं

  - Prashant Sitapuri
इनआँखोंमेंबसायीइसनमीकादुखसमझतेहैं
उजालेकबघरोंकीतीरगीकादुखसमझतेहैं
हमेंखुलकरबताएँतोउदासीकासबबक्याहै
हमऐसेलोगहैंजोहरकिसीकादुखसमझतेहैं
मैंनेयेसोचकरहीआपसेदुखकहदियाअपना
यहीकीआपसोज़-ए-ज़िंदगीकादुखसमझतेहैं
हमारेदुखसेउनकोभीनहींहैवास्ताकोई
हमारेदोस्ततोबसशा'इरीकादुखसमझतेहैं
किसीलोहेकोपीतलक्याकभीभीकाटसकताहै
याकेवलआदमीहीआदमीकादुखसमझतेहैं
  - Prashant Sitapuri
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