aaya khyaal dekh ke lehje alag alag | आया ख़याल देख के लहजे अलग अलग

  - Prashant Sitapuri
आयाख़यालदेखकेलहजेअलगअलग
रहनापड़ेगाअबसेकिहाएअलगअलग
उससेेजुदाहुयेतोयेभीइल्महोगया
इकजानदोबदनहुयेकैसेअलगअलग
सारेदुखोंकोरोलियाइकरोज़बैठकर
इतनाकहाँथावक़्तकिरोतेअलगअलग
पहलेज़बाँदीबादज़बाँसेपलटगया
किरदारएकशख़्ससेनिकलेअलगअलग
जिसकोमैंनेंयेदिलदियाथाएकबारमें
लौटारहीहैवोमुझेटुकड़ेअलगअलग
मेरीपसंदऔरथीउसकीपसंदऔर
इसवास्तेथेलाज़िमीरस्तेअलगअलग
उनसेेसवाल-ए-वस्लभीकरनाफुज़ूलहै
जोदोस्तभीहोऔरहोबैठेअलगअलग
  - Prashant Sitapuri
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