na waqt se pal pighal raha hai na aasmaañ ye machal raha hai | न वक़्त से पल पिघल रहा है, न आसमाँ ये मचल रहा है

  - Prashant Beybaar
वक़्तसेपलपिघलरहाहै,आसमाँयेमचलरहाहै
मेरेयेहालातजमगएहैं,येसाललेकिनबदलरहाहै
घटाकीजुम्बिशहवाकीहरकत,कहींकिसीकोतोचैनआए
येपाँवबेहिसयहींरुकेहैं,येदिलकहींदूरचलरहाहै
किसीनेदीथीख़बरतुम्हारी,घड़ीपेमेरीनज़रटिकीहै
येजाँहैरह-रहतड़परहीहै,येदिलहैतबसेबहलरहाहै
कोईपुरानाख़ज़ानाजैसे,तेरावोख़तभीरखाहुआहै
वोयादतेरीगुज़ररहीहै,येदर्दमेरासँभलरहाहै
  - Prashant Beybaar
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