"प्यास"
येपानीकाघड़ारोज़हीभराजाताहै
मगररातहोतेहोतेयेख़ालीहोजाताहै
औरमेरीप्यासजोकभीबुझतीहीनहीं
फिरनईसुब्हकाइंतज़ारकरतीहै
किकलफिरसेयेघड़ाभराजाएगा
तबशायदमेरीप्यासबुझापाएगा
येसिलसिलायूँँहीचलतारहताहै
मेरादिनरोज़यूँँहीढलतारहताहै
बसइकइसीउम्मीदपरहूँज़िन्दा
कभीउड़केआएगाकोईपरिंदा
जोमुझेइसघड़ेसेनजातदिलाएगा
औरकिसीदरियाकीराहदिखाएगा