pyaas | "प्यास"

  - Pragya Chakrapani
"प्यास"
येपानीकाघड़ारोज़हीभराजाताहै
मगररातहोतेहोतेयेख़ालीहोजाताहै
औरमेरीप्यासजोकभीबुझतीहीनहीं
फिरनईसुब्हकाइंतज़ारकरतीहै
किकलफिरसेयेघड़ाभराजाएगा
तबशायदमेरीप्यासबुझापाएगा
येसिलसिलायूँँहीचलतारहताहै
मेरादिनरोज़यूँँहीढलतारहताहै
बसइकइसीउम्मीदपरहूँज़िन्दा
कभीउड़केआएगाकोईपरिंदा
जोमुझेइसघड़ेसेनजातदिलाएगा
औरकिसीदरियाकीराहदिखाएगा
  - Pragya Chakrapani
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