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Amanpreet singh
sabhi ki maanne se ghar ka sab kuchh toot jaata hai
sabhi ki maanne se ghar ka sab kuchh toot jaata hai | सभी की मानने से घर का सब कुछ टूट जाता है
- Amanpreet singh
सभी
की
मानने
से
घर
का
सब
कुछ
टूट
जाता
है
मोहब्बत
में
नकल
करने
से
पेपर
छूट
जाता
है
- Amanpreet singh
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मोहब्बत
का
सुबूत
अब
और
क्या
दें
तुम्हारी
माँ
को
माँ
कहने
लगे
हैं
Shadab Asghar
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ये
मोहब्बत
है
ये
मर
जाने
से
भी
जाती
नहीं
तू
कोई
क़ैदी
नहीं
है
जो
रिहा
हो
जाएगा
Ali Zaryoun
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इश्क़
हमारा
चाँद
सितारे
छू
लेगा
घुटनों
पर
आकर
इज़हार
किया
हमने
Darpan
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ज़िंदगी
यूँँही
बहुत
कम
है
मोहब्बत
के
लिए
रूठ
कर
वक़्त
गँवाने
की
ज़रूरत
क्या
है
Unknown
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फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
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Harsh saxena
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अगरचे
इश्क़
में
मजनू
बड़े
बदनाम
होते
हैं
अगरचे
क़ैस
जैसे
आशिक़ों
के
नाम
होते
हैं
भटक
सकती
नहीं
जंगल
में
लैला
चाह
करके
भी
अजी
लैला
को
घर
में
दूसरे
भी
काम
होते
हैं
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Gagan Bajad 'Aafat'
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ऐ
इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
हाँ
इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
आज
एक
सितमगर
को
हँस
हँस
के
रुलाना
है
Jigar Moradabadi
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वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
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Dushyant Kumar
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तुम्हारे
साथ
था
तो
मैं
गम-ए-उल्फ़त
में
उलझा
था
तुम्हें
छोड़ा
तो
ये
जाना
कि
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
Nirbhay Nishchhal
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मैं
तेरे
साथ
सितारों
से
गुज़र
सकता
हूँ
कितना
आसान
मोहब्बत
का
सफ़र
लगता
है
Bashir Badr
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क्या
पता
कब
ख़राब
हो
जाऊॅं
कल
को
मैं
भी
हिजाब
हो
जाऊॅं
आपके
साथ
ठीक
लगता
है
आप
जैसा
ख़राब
हो
जाऊॅं
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Amanpreet singh
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असर
फिर
इश्क़
का
होने
लगा
है
मोहब्बत
में
ये
दिल
रोने
लगा
है
तेरी
बातें
बुरी
क्यूँ
लग
रही
है
दिखे
दिल
खुद
सेे
अब
खोने
लगा
है
लड़ाई
तो
किसी
के
ज़िक्र
की
थी
उसी
का
ज़िक्र
फिर
होने
लगा
है
तुम्हें
नफ़रत
सी
मुझ
सेे
हो
रही
है
मुझे
महसूस
ये
होने
लगा
है
बिना
मेरे
भी
जी
सकते
हो
हाँ
तुम
ये
सुन
दिल
मेरा
इक
कोने
लगा
है
बड़ी
मुश्किल
ये
दिल
से
बात
निकली
किसी
का
फिर
से
वो
होने
लगा
है
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Amanpreet singh
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मोहब्बत
जो
समझ
आने
लगी
है
उदासी
नाचने
गाने
लगी
है
उसे
बस
देख
कर
ख़ुश
होता
हूॅं
सो
वो
अब
तस्वीर
से
जाने
लगी
है
हुआ
है
सामना
ऐसा
किसी
से
दग़ाबाज़ी
भी
शरमाने
लगी
है
मेरे
होते
हुए
ऐसी
नहीं
थी
जो
अब
के
जाम
छलकाने
लगी
है
तो
खेला
इश्क़
में
जाता
है
ऐसे
मुझे
भी
अक़्ल
सी
आने
लगी
है
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Amanpreet singh
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मोहब्बत
तुझ
में
अब
जादू
नहीं
है
किसी
के
हाथ
में
चाक़ू
नहीं
है
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Amanpreet singh
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दुखों
के
साथ
जीना
भी
ज़रूरी
है
लटकने
से
यूँँ
डरना
भी
ज़रूरी
है
ये
बातें
बाद
में
फिर
से
करेंगे
हम
हमारा
फिर
से
लड़ना
भी
ज़रूरी
है
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Amanpreet singh
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