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Amanpreet singh
nayi naslein nayi baatein naya sab kuchh
nayi naslein nayi baatein naya sab kuchh | नई नस्लें नई बातें नया सब कुछ
- Amanpreet singh
नई
नस्लें
नई
बातें
नया
सब
कुछ
सभी
पर
इश्क़
में
बर्बाद
वैसे
ही
- Amanpreet singh
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इक
लड़की
से
बात
करो
तो
लगता
है
इस
दुनिया
को
छोड़
के
भी
इक
दुनिया
है
Shadab Asghar
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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तुम
मुख़ातिब
भी
हो
क़रीब
भी
हो
तुम
को
देखें
कि
तुम
से
बात
करें
Firaq Gorakhpuri
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कू-ब-कू
फैल
गई
बात
शनासाई
की
उस
ने
ख़ुश्बू
की
तरह
मेरी
पज़ीराई
की
Parveen Shakir
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उसे
किसी
से
मोहब्बत
थी
और
वो
मैं
नहीं
था
ये
बात
मुझ
सेे
ज़ियादा
उसे
रुलाती
थी
Ali Zaryoun
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जिस
की
बातों
के
फ़साने
लिक्खे
उस
ने
तो
कुछ
न
कहा
था
शायद
Ada Jafarey
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कुछ
बात
है
कि
हस्ती
मिटती
नहीं
हमारी
सदियों
रहा
है
दुश्मन
दौर-ए-ज़माँ
हमारा
Allama Iqbal
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वो
तिरे
नसीब
की
बारिशें
किसी
और
छत
पे
बरस
गईं
दिल-ए-बे-ख़बर
मिरी
बात
सुन
उसे
भूल
जा
उसे
भूल
जा
Amjad Islam Amjad
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मिले
तो
कुछ
बात
भी
करोगे
कि
बस
उसे
देखते
रहोगे
Shariq Kaifi
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इक
बदन
की
तलब
लग
रही
है
मुझे
और
यूँँ
बे-सबब
लग
रही
है
मुझे
ज़िंदगी
में
नहीं
ख़ास
कुछ
भी
मगर
साथ
तेरे
ग़ज़ब
लग
रही
है
मुझे
आस
कितनी
लगाए
हुए
बैठे
हैं
लड़की
पेड़ों
सी
अब
लग
रही
है
मुझे
होंठ
उसके
दिखे
थे
मुझे
एक
दिन
ज़िंदगी
तब
से
लब
लग
रही
है
मुझे
बात
जो
बा-अदब
लग
रही
है
तुम्हें
वो
बड़ी
बे-अदब
लग
रही
है
मुझे
उसका
कहना
है
मैं
ख़ुद
बताऊँ
उसे
ये
तलब
कब
की
अब
लग
रही
है
मुझे
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Amanpreet singh
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कुछ
तो
होने
को
बाक़ी
रहता
है
पीछे
मेरे
जो
माज़ी
रहता
है
वो
मोहब्बत
के
जैसी
है
बिल्कुल
डर
बिछड़ने
का
हावी
रहता
है
एक
लम्हे
में
भूल
सकता
हूॅं
ज़िक्र
तेरा
तो
यूँँ
ही
रहता
है
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Amanpreet singh
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लड़ाई
के
लिए
ही
फिर
उसे
मैं
याद
आया
था
किसी
की
बात
को
लेकर
वो
अरसे
बाद
आया
था
Amanpreet singh
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छोड़
कर
जाने
लगा
था
प्यार
समझाने
लगा
था
उन
के
दिल
को
ये
लगा
है
इश्क़
अब
खाने
लगा
था
आज
फिर
ये
बात
आई
कौन
ही
जाने
लगा
था
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Amanpreet singh
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बाल
बाँध
कर
वो
दो
लट
निकाल
लेती
है
जान
वान
वो
ऐसे
भी
निकाल
लेती
है
Amanpreet singh
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