vo ras kaanon men ghole ja raha tha | वो रस कानों में घोले जा रहा था

  - Bhargav Thaker
वोरसकानोंमेंघोलेजारहाथा
मैंसुनताथावोबोलेजारहाथा
लब-ओ-लहजाथाकुछसरगोशियोंसा
नक़ाब-ए-राज़खोलेजारहाथा
कहूँक्याहिज्रकेलम्होंकाआलम
वोपलअश्कोंसेतोलेजारहाथा
सर-ए-मंज़रथेसबबोसीदालम्हे
पुरानेख़तटटोलेजारहाथा
हमेंवीरानियाँरातोंकीदेकर
शगुफ़्ताशामवोलेजारहाथा
  - Bhargav Thaker
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