hua is shahar men phir haadisa hai kya | हुआ इस शहर में फिर हादिसा है क्या

  - Pradeep Kumar
हुआइसशहरमेंफिरहादिसाहैक्या
तुम्हेंइंसानोंसेभीआसराहैक्या
लगाकरदिलयहाँरहपाओगेकैसे
किसीज़ालिमसेकोईवास्ताहैक्या
कमानेआएथेतुमगाँवसेहमदम
ग़लतचलनिकलेहोतुमरास्ताहैक्या
कहींमिलकरसहीकहलेंगेरोलेंगे
जुदाईहैअगरभीफ़ासलाहैक्या
तूजिसकोछोड़करआईहैमेरीजाँ
उसीसेमिलनाकोईमाज़राहैक्या
वहीलड़कीजोग़ुस्सानाकपरपाले
उसीसेदोस्ततेराराब्ताहैक्या
उठानेमुझकोमेरेदोस्तआएँगे
किवाड़ेंखोलकोईआश्नाहैक्या
  - Pradeep Kumar
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