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Chetan Verma
aankhoñ se meri ik dariyaa chhalaka
aankhoñ se meri ik dariyaa chhalaka | आँखों से मेरी इक दरिया छलका
- Chetan Verma
आँखों
से
मेरी
इक
दरिया
छलका
तेरी
रहमत
जो
ये
सहरा
छलका
साथ
तेरे
सुकूँ
से
रहे
हम
फिर
तिरे
जाने
का
लम्हा
छलका
रात
गुज़री
तिरी
जिस
भी
साए
उसकी
दहलीज़
से
नग़्मा
छलका
लम्स
से
तेरे
चेहरे
पे
मेरे
हर
दफ़ा
इक
नया
चेहरा
छलका
सर
उठा
जब
फ़लक
देखा
तुमने
लुत्फ़
में
आसमाँ
कैसा
छलका
ग़ुस्सा
छलका
तिरे
होंटों
से
भी
मेरे
होंटों
से
बस
बोसा
छलका
जाम
लबरेज़
ख़ुशनूदी
से
था
जाने
पे
तेरे
जो
पूरा
छलका
अब
वफ़ा
की
दुहाई
का
क्या
मोल
तेरी
तासीर
जब
धोखा
छलका
- Chetan Verma
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इश्क़
मिटाने
की
कोशिश
करता
हूँ
उसको
भुलाने
की
कोशिश
करता
हूँ
अब
उस
सेे
सिर्फ़
दर्द
का
नाता
है
दर्द
बढाने
की
कोशिश
करता
हूँ
आती
हैं
मौत
बनके
उसकी
यादें
जान
बचाने
की
कोशिश
करता
हूँ
लोगों
से
थक
के
दरख़्तों
को
अब
मैं
हाल
सुनाने
की
कोशिश
करता
हूँ
अक्स
पे
अपने
मैं
मारता
हूँ
पत्थर
क़ैस
बनाने
की
कोशिश
करता
हूँ
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उस
शहर-ए-नाकाम
के
बाशिंदे
हैं
हम
जहाँ
मिल
कर
के
मुर्दे
सभी
ज़िंदा
को
दफ़नाते
हैं
Chetan Verma
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साए
को
बिल्कुल
भी
डर
नहीं
लगता
रौशनी
में
आए
गर
नहीं
लगता
दिल
की
जगह
पे
तो
लगता
है
दिल
ही
इश्क़
के
मौज़ू
में
सर
नहीं
लगता
क़िल्लत-ए-गुफ़्तार
मारे
सब
रिश्ते
चुप
सी
ज़मीनों
पे
घर
नहीं
लगता
ख़ुद
को
सजाए
वो
और
सँवारे
भी
हुस्न
सजाने
पे
कर
नहीं
लगता
दिल
है
ये
तन्हाई
में
लगे
जिसका
भीड़
में
फिर
उम्र
भर
नहीं
लगता
देखे
है
इक
टक
तू
उसको
भी
'चेतन'
खोने
से
ये
नज़रें
डर
नहीं
लगता
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Chetan Verma
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हो
कोई
भुलाना
तो
सजा
मुझको
बेहद
ही
दिवाना
दिल
मिला
मुझको
जो
साथ
चले
कोई
तो
चल
दूँ
मैं
तन्हा
यहाँ
चलना
अब
क़ज़ा
मुझको
कब
का
ही
बिछड़
गया
था
वो
मुझ
सेे
एहसास
बिछड़
के
ये
हुआ
मुझको
इक
शख़्स
है
खोया
मैंने
ऐसे
भी
फिर
उस
में
भी
वो
नहीं
मिला
मुझको
ऐ
इश्क़
मैं
तुझको
पा
नहीं
सकता
टूटे
किसी
गुल
की
बद्दुआ
मुझको
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Chetan Verma
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सो
गया
फिर
आज
कोई
रोते
रोते
हो
गई
थी
रात
यूँँ
ही
रोते
रोते
कैसा
मेरा
ये
त'अल्लुक़
दर्द
से
है
गुज़री
हर
इक
साँस
मेरी
रोते
रोते
क्या
हूँ
मैं
बरसात
का
बादल
जो
मेरी
ज़िंदगी
बीतेगी
यूँँ
ही
रोते
रोते
ये
अज़िय्यत
तालिब-ए-दीदार
की
जो
आँखें
सोती
भी
हैं
मेरी
रोते
रोते
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Chetan Verma
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