kya bataaun kya hunar tha baagbaan men | क्या बताऊँ क्या हुनर था बाग़बाँ में

  - Prashant Prakhar
क्याबताऊँक्याहुनरथाबाग़बाँमें
क्यामहकघोलीहवा-ए-गुलसिताँमें
जिनकेदिलमेंजुगनुओंसीरौशनीथी
आजबनतारेसजेहैंआसमाँमें
राहचलतेजानेकितनेशख़्सबदले
सबमेरेहमदर्दहीथेकारवाँमें
घरउजड़नेकामैंउसदिनदर्दसमझा
जबलगीख़ुदआगमेरेआशियाँमें
आजतकइसबातपरहैरानहूँमैं
थाफ़क़तकिरदारतेरीदास्ताँमें
इश्क़मेंथाहारभीमंज़ूरलेकिन
सकेअव्वलनहींइसइम्तिहाँमें
वोबहुतख़ामोशरहताहैहमेशा
हैअजबसीबाततेरेहम-ज़बाँमें
  - Prashant Prakhar
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