ज़िंदगी का बे-हिसाब आसाँ सफ़र हो जाएगा

  - Milan Gautam
ज़िंदगीकाबे-हिसाबआसाँसफ़रहोजाएगा
तुमठहरजाओअगरदिलमेंयेघरहोजाएगा
हमबदनहैंख़ाकमेंमिलजाएँगेइकदिनकभी
परहमाराइश्क़ग़ज़लोंमेंअमरहोजाएगा
एकइसीकारणनहींक़ुर्बतबढ़ाताउससेेमैं
पासआनेसेबिछड़जानेकाडरहोजाएगा
मैंतोकेवलतुख़्मबोसकताहूँबंजरभूमिमें
वोनिगहबानीकरेतोयेशजरहोजाएगा
राह-गीरोंकीकमीक्याहैरह-ए-रूमानमें
दोक़दमकेबादकोईहम-सफ़रहोजाएगा
हमसेबे-हिसलोगपत्थरदिलतोहोतेहैंमगर
बोसा-ए-लाल-ए-बुताँपाकरअसरहोजाएगा
अपनी-अपनीआस्थाहैअपने-अपनेदीनपर
पूजलोतोदिल-सिताँभीईश्वरहोजाएगा
जिस्म-ए-संग-ए-मरमरउसकाआँखोंमेंजलतेचराग़
साग़र-ए-शबछूलेतोजाम-ए-सहरहोजाएगा
मैंसुख़नकोबेचकरदौलतकमाऊँगा'मिलन'
तेराभाईशाइर-ए-इफ़रात-ए-ज़रहोजाएगा
  - Milan Gautam
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