jitna hai mujh pe uskaa asar kheench loon abhii | जितना है मुझ पे उसका असर खींच लूँ अभी

  - Nishant Choudhary
जितनाहैमुझपेउसकाअसरखींचलूँअभी
गरउसनज़ारेसेमैंनज़रखींचलूँअभी
रेशानिकालकरकेसमुंदरउधेड़दूँ
जीकररहाहैमैंयेलहरखींचलूँअभी
बरसोंसेदफ़्नहोकेभीलहरारहेहैंजो
अरमांयेखोददूँयेशजरखींचलूँअभी
मुझमेंजोरंगक़ैदहैंसबहोंरिहाकिमैं
शीशेसेउसकासाराहुनरखींचलूँअभी
हररोज़केहैंमेरेसवालातशामसे
यारातकाटलूँयासहरखींचलूँअभी
होजाएगाक्याउससेतमाशाजहाँकाख़त्म
वापससदा-ए-कुनजोअगरखींचलूँअभी
  - Nishant Choudhary
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