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Praveen Sharma SHAJAR
teraa khayal ha
teraa khayal ha | तेरा ख़याल हमें इस क़दर सुहाना लगा
- Praveen Sharma SHAJAR
तेरा
ख़याल
हमें
इस
क़दर
सुहाना
लगा
कि
ज़िंदगी
का
कोई
दर्द
फिर
बुरा
न
लगा
गुज़ारिशें
हैं
भले
दिल
लगा
लगा
न
लगा
मगर
कि
यार
मुझे
इश्क़
की
हवा
न
लगा
हज़ार
बार
मुझे
दोस्तों
ने
समझाया
मगर
वो
शख़्स
कभी
मुझको
बे-वफ़ा
न
लगा
ये
ज़ख़्म
इश्क़
में
पाया
है
हादिसे
में
नहीं
तू
इस
पे
होंठ
लगा
दे
इसे
दवा
न
लगा
- Praveen Sharma SHAJAR
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वफ़ा
थी
इश्क़
था
मासूमियत
थी
तुम्हारे
बाद
सब
कुछ
मर
गया
है
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मेरे
ख़त
को
तू
जब
पढ़ना
ज़रा
सा
ध्यान
से
पढ़ना
मेरे
ख़त
में
शिकायत
के
अलावा
भी
बहुत
कुछ
है
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तेरी
यादों
का
मौसम
ख़ूब-सूरत
है
मगर
फिर
भी
इसे
जाना
पड़ेगा
अब
ये
अगली
रुत
में
अड़चन
है
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हमने
जिनको
क़ाफ़िले
की
ज़िम्मेदारी
सौंप
दी
क्या
पता
था
हम
सेफ़र
वो
रहज़नों
से
कम
नहीं
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आग
से
पूछ
रौशनी
क्या
है
ग़ौर
से
देख
ज़िन्दगी
क्या
है
ढूँढ़
कोई
बिलखती
बूढ़ी
माँ
और
फिर
सोच
बेबसी
क्या
है
अपने
ही
दिल
का
ख़ून
ख़ुद
ही
पी
पूछना
तब
ये
शा'इरी
क्या
है
कितनी
नदियों
से
प्यासा
लौटा
हूँ
मैं
समझता
हूँ
तिश्नगी
क्या
है
मैंने
देखा
था
माँ
को
ख़ुश
होते
तब
मैं
समझा
था
ये
ख़ुशी
क्या
है
उलझे
लोगों
से
भी
मिला
हूँ
मैं
जानता
हूँ
कि
सादगी
क्या
है
होंठ
आँखें
वो
मुस्कुराहट
सब
और
बतलाऊँ
क़ीमती
क्या
है
फ़ाइलें
गिन
बलात्कारों
की
तब
तू
समझेगा
आदमी
क्या
है
एक
गाड़ी
अभी
जो
छूटी
है
ये
बताती
है
आख़िरी
क्या
है
मैंने
मीरा
को
रोते
देखा
है
मैं
समझता
हूँ
आशिक़ी
क्या
है
ज़िन्दगी
चल
मिलेगा
फिर
कोई
ऐसी
बातों
पे
रूठती
क्या
है
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Praveen Sharma SHAJAR
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