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Praveen Sharma SHAJAR
mere aangan kii bel hai sahab
mere aangan kii bel hai sahab | मेरे आँगन की बेल है साहब
- Praveen Sharma SHAJAR
मेरे
आँगन
की
बेल
है
साहब
जिसका
उस
घर
में
खेल
है
साहब
फिर
न
मिलनी
जो
इक
दफ़ा
छूटी
ज़िन्दगी
जैसे
रेल
है
साहब
बूढ़े
होकर
भी
जलते
रहते
हैं
इन
चराग़ों
में
तेल
है
साहब
आपके
साथ
की
ये
आज़ादी
इस
सेे
बेहतर
तो
जेल
है
साहब
आज
मेरी
है
कल
तुम्हारी
थी
देखो
दौलत
रखेल
है
साहब
पंछियों
की
नज़र
है
दाने
पर
मेरे
हाथों
गुलेल
है
साहब
- Praveen Sharma SHAJAR
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मिसरा-कारी
का
फ़न
नहीं
आया
गिरिया
ज़ारी
का
फ़न
नहीं
आया
अब
भी
तुमको
ही
दुनिया
कहता
हूँ
दुनिया
दारी
का
फ़न
नहीं
आया
और
भी
काम
थे
मुझे
यूँँ
भी
सो
ख़ुमारी
का
फ़न
नहीं
आया
तुम
से
बिछड़ा
हूँ
चैन
से
हूँ
मैं
बे-क़रारी
का
फ़न
नहीं
आया
मुँह
पे
सच
बोलने
की
आदत
है
रिश्ते-दारी
का
फ़न
नहीं
आया
जिस
सेे
रखता
हूँ
दिल
से
रखता
हूँ
झूठी
यारी
का
फ़न
नहीं
आया
तुम
भी
अटके
रहे
वफ़ा
पर
ही
जाँ
निसारी
का
फ़न
नहीं
आया
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उसके
बिन
तुम
रह
सकते
हो
समझो
मत
ख़ुद
को
शायर
कह
सकते
हो
समझो
मत
सबको
अपना
समझा
तब
ये
समझा
है
सबको
अपना
कह
सकते
हो
समझो
मत
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Praveen Sharma SHAJAR
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तुम
सेे
मिलकर
यूँँ
लगता
है
जैसे
बाग़
में
फूल
खिला
है
तुम
अपने
से
क्यूँँ
लगते
हो
मेरा
तुम
सेे
क्या
रिश्ता
है
हमने
इश्क़
तो
छोड़
दिया
था
इश्क़
ने
पर
किसको
छोड़ा
है
और
भला
अब
क्या
बतलाऊँ
हाल
मिरा
भी
तुम
जैसा
है
लेकिन
अच्छा
क्या
तुमको
भी
और
कोई
अच्छा
लगता
है
तुम
सेे
बेहतर
कौन
मिलेगा
पर
तुमने
भी
कब
मिलना
है
तुम
अच्छी
लड़की
हो
लेकिन
क्या
वो
भी
अच्छा
लड़का
है
नाम
पता
चेहरा
आवाज़ें
तू
तो
सब
कुछ
भूल
चुका
है
मैं
तो
इक
रोता
चेहरा
हूँ
रोता
चेहरा
कहाँ
बिका
है
वो
लड़की
तो
अनपढ़
थी
ना
उस
का
ख़त
किसने
लिक्खा
है
अब
तो
मैसेंजर
चलते
हैं
ख़त
का
ज़माना
कहाँ
बचा
है
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मैंने
इनको
जिया
ही
नहीं
था,
मैं
तो
ग़ज़लें
फ़क़त
पढ़
रहा
था
हाथ
में
डायरी
ध्यान
तुम
पर,
देख
कर
भी
ग़लत
पढ़
रहा
था
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कहते
हैं
जिसे
लोग
इश्क़,
प्यार,
दर्द
है
ख़ुशियाँ
हैं
इस
में
झूठ
मेरे
यार
दर्द
है
जिनको
ये
दर्द
ना
मिला
वो
चीखते
रहे
जिनको
मिला
उनके
लिए
बेकार
दर्द
है
ऐसा
नहीं
कि
आज
हुआ
कल
नहीं
हुआ
ये
दर्द
है
तो
दर्द
है
हर
बार
दर्द
है
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