zakhamon pe zakhm kh | ज़ख़्मों पे ज़ख़्म खाए ज़माने गुज़र गए

  - Navneet krishna
ज़ख़्मोंपेज़ख़्मखाएज़मानेगुज़रगए
पत्थरभीघरमेंआएज़मानेगुज़रगए
वोदोस्तीकाहोयाकोईदुश्मनीकाहो
रिश्ताकोईनिभाएज़मानेगुज़रगए
कैसीहैकमनसीबीकेठोकरभीदोस्तों
उसकीगलीमेंखाएज़मानेगुज़रगए
कुछतोकोईबताएकेचौखटपेदेरशब
उसकोदियाजलाएज़मानेगुज़रगए
आईनाहैदिवारपेचस्पाँउसीतरह
अक्सोंकोमुँहचिढाएज़मानेगुज़रगए
मेरीनिगाहअबभीउसीसिम्तहैमगर
खिड़कीपेउसकोआएज़मानेगुज़रगए
हैनाममेराअबभीरईसोंमेंहीशुमार
पा-फ़ाख्ताउड़ाएज़मानेगुज़रगए
  - Navneet krishna
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