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Navneet Vatsal Sahil
rona zabt hai
rona zabt hai | "रोना ज़ब्त है"
- Navneet Vatsal Sahil
"रोना
ज़ब्त
है"
मैं
पूछता
हूँ
ख़ुदास
वो
ख़ुदा
जो
सबका
है
मेरा
नईं
ये
अलग
बात
है
जानाँ
तुम
भी
ख़ुदा
ही
थीं
मुझे
इसलिए
शायद
अब
मेरा
कोई
भी
तो
ख़ुदा
नईं
फिर
भी
पूछता
हूँ
क्या
ये
लोग
कभी
नहीं
रोयेंगे?
किसी
रोज़
इनके
चश्में-तर
नहीं
होंगे?
मैं
पूछूँगा
उस
रोज़
जब
इनका
अपना
इनसे
छिन
जाएगा
रोते
क्यूँँ
हो
रोना
ज़ब्त
है
- Navneet Vatsal Sahil
हमको
तो
प्यार
चाहिए
था
तेरा
प्यार
सिर्फ़
इस
बात
से
वफ़ा
का
कोई
वास्ता
नहीं
Vikas Rajput
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होंटों
पर
इक
बार
सजा
कर
अपने
होंट
उस
के
बाद
न
बातें
करना
सो
जाना
Ateeq Allahabadi
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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है
कुछ
ऐसी
ही
बात
जो
चुप
हूँ
वर्ना
क्या
बात
कर
नहीं
आती
Mirza Ghalib
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तमाम
बातें
जो
चाहता
था
मैं
तुम
सेे
कहना
वो
एक
काग़ज़
पे
लिख
के
काग़ज़
जला
दिया
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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ये
है
पहली
बात
तुझ
सेे
इश्क़
है
दूसरी
ये
बात,
पहली
बात
सुन
Siddharth Saaz
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वो
तिरे
नसीब
की
बारिशें
किसी
और
छत
पे
बरस
गईं
दिल-ए-बे-ख़बर
मिरी
बात
सुन
उसे
भूल
जा
उसे
भूल
जा
Amjad Islam Amjad
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जब
मसअले
न
हल
हो
सकें
बात-चीत
से
फिर
जंग
ही
लड़ो
कि
ज़माना
ख़राब
है
shaan manral
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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तुम्हें
ये
किसने
कहा
रब
को
नहीं
मानता
मैं
ये
और
बात
कि
मज़हब
को
नहीं
मानता
मैं
Bhaskar Shukla
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तुझ
को
देखना
हम-आग़ोश
न
कर
लें
वो
तू
यूँँ
न
जी
शीशों
का
ललचाया
कर
Navneet Vatsal Sahil
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बस
इक
तेरे
होने
से
घर
बनता
है
कहने
को
तो
सबकी
हिस्सेदारी
है
Navneet Vatsal Sahil
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गर
तुझ
से
मैं
रूठ
नहीं
सकता
तो
क्या
मुझ
को
जान-ए-जाँ
बे-वज्ह
मनाया
कर
Navneet Vatsal Sahil
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बेहोशी
के
आलम
अब
तक
तारी
हैं
हम
ने
उस
पर
इतनी
साँसे
वारी
हैं
Navneet Vatsal Sahil
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इस
दिल
को
गोकुल
धाम
किए
है
इक
राधा
मुझ
को
श्याम
किए
है
Navneet Vatsal Sahil
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