kyun bichaata hai nazaare tu lubhaane ke li.e | क्यूँँ बिछाता है नज़ारे तू लुभाने के लिए

  - Navin Joshi
क्यूँँबिछाताहैनज़ारेतूलुभानेकेलिए
जबपताहैतुझेआयाहूँमैंजानेकेलिए
वोकोईरस्महोरिश्ताहोयाफिरजीवनहो
मैंनिभाऊँगानहींसिर्फ़निभानेकेलिए
जिन
मेंबनतीनहींरक्खेहैंवोदोमैंमैंने
एकमैंमेरेलिएएकज़मानेकेलिए
डरलगामुझकोकिदुनियाजलादेसारी
औरमैंरोपड़ावोआगबुझानेकेलिए
लाव-लश्करतेरादुश्मनकोमुबारकमेरे
मुझकोकाफ़ीहैतूहरजंगजितानेकेलिए
येतसल्लीरहेदिलकोतेरेमेरेरक़ीब
मैंजीतूँगाकभीतुझकोहरानेकेलिए
शिव-धनुषउठनहींसकतायेग़लतबातहैदोस्त
बसकोईरामनहींमिलताउठानेकेलिए
  - Navin Joshi
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