visaal-o-hijr to jeevan men aisa tha ki lagta hai | विसाल-ओ-हिज्र तो जीवन में ऐसा था कि लगता है

  - Naaz ishq
विसाल-ओ-हिज्रतोजीवनमेंऐसाथाकिलगताहै
तुम्हेंमेरेमुक़द्दरमेंलिखालिखकेमिटायाहै
समझताहैयहीवोभीयहीमैंभीसमझताहूँ
मैंउसकोयादकरताहूँवोमुझकोयादकरताहै
तेरेहोतेभीसबकोमेरीजानिबखींचलूँगामैं
तिरीआँखोंसेमेरेज़ख़्मोंमेंगहराईज़्यादाहै
कभीमें'आरतकतुमतोहमारेनहींसकते
यहींकहनातुम्हाराथायहीकहनाहमाराहै
बिछड़केमुझसेेवोभीशा'इरीकरनेलगाहैअब
मैंउसपेशे'रकहताहूँवोमुझपेशे'रकहताहै
  - Naaz ishq
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