roo-b-roo bhi na tu aur ojhal nahin | रू-ब-रू भी न तू और ओझल नहीं

  - Naaz ishq
रू-ब-रूभीतूऔरओझलनहीं
यादआतीहैलेकिनमुसलसलनहीं
क्यात'अल्लुकबढ़ाऊॅंमुझेइल्महै
आजवोशख़्सहोगामगरकलनहीं
उसकीशादीथीकलरातकोऔरआज
सुब्हसेमेरेकमरेमेंहल-चलनहीं
मेरेअल्फ़ाज़मेंयूँॅंहीआतिशहै
दोस्तकाफ़ीतपाहूॅंमैंसोजलनहीं
अज्नबिय्यतहोयादोस्तीहोकिइश्क़
तुझसेकोईत'अल्लुकमुकम्मलनहीं
दश्त-ए-इमकाँमेंहमचलपड़ेथेमगर
धूपहीधूपहैकोईबादलनहीं
पड़गईसिलवटेंआजबिस्तरपे'नाज़'
आजउसकीजबींपेकोईबलनहीं
  - Naaz ishq
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