mujhe kabhi bhi muhabbat samajh nahin aayi | मुझे कभी भी मुहब्बत समझ नहीं आई

  - Maher painter 'Musavvir'
मुझेकभीभीमुहब्बतसमझनहींआई
परउससेेज़्यादातोनफ़रतसमझनहींआई
नशीनतख़्तपेहो,मुफ़्लिसोंसेतेवरहैं
मुझेतुम्हारीसियासतसमझनहींआई
गुनाहगारनहीं,आमलोगक़ैदमेंहै
भलायेकैसीहिफ़ाज़त,समझनहींआई
गुलोंकेसाथयेपानीपिलाएकांँटोको
येबाग़बांकीशराफ़तसमझनहींआई
तुम्हेंयेख़्वाबहमारासमझनहींआया
हमेंतुम्हारीहक़ीक़तसमझनहींआई
रगोंसेमर्दकीऔरतहरएकवाकिफ़है
किसीभीमर्दकोऔरतसमझनहींआई
वोशख़्सजिसकोमुहब्बतहुईहोतुमसे
उसेख़ुदाकीकरामतसमझनहींआई
  - Maher painter 'Musavvir'
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