koii saazish thii muhabbat ka to ye kaam na tha | कोई साज़िश थी मुहब्बत का तो ये काम न था

  - Vikas Shah musafir
कोईसाज़िशथीमुहब्बतकातोयेकामथा
हाथोंपेमेहंदीतोदेखीथीमगरनामथा
इश्क़कीलतनेमेरीशानकोबदलाहुआहै
वर्नामैंपहलेकभीइतनातोबदनामथा
भलेहीइश्क़मुकम्मलहुआहोमेरा
परकभीइश्क़केमैदानमेंनाकामथा
मुस्कुराकरदुखीचेहराछुपालेताथामैं
साथथावोमेरेपरराहतओआरामथा
आख़िरीवारभीअपनालियादुश्मननेमगर
मैंतोयेजानताथावोमेराइतमामथा
मुझसेेसौदाकियाथाउल्फ़तएआरिज़काबस
जोभीमुझकोमिलाथाइश्क़सेइनआमथा
  - Vikas Shah musafir
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