huzoom-e-rahguzaar sii hai sukhun men aur bacha kya hai | हुजूम-ए-रहगुज़र सी है सुख़न में और बचा क्या है

  - Vikas Shah musafir
हुजूम-ए-रहगुज़रसीहैसुख़नमेंऔरबचाक्याहै
अयाँमेंहरतरफ़फैलाख़यालाभीसुख़नसाहै
यहाँबिकताहैसबनीलेगुलाबीपीलेनोटोंसे
बिनालालचकेइज़्ज़तहैयेलोगोंकादिखावाहै
हयाकरताहूँऔरतकीयहीकमज़ोरीहैमेरी
इसीकायेज़मानाफ़ाएदापूराउठाताहै
मुझेअबनींदभीआतीहैगरतोगोलियाँखाकर
तभीफिरख़्वाबमेंनागिनकाचेहरादिखनेलगताहै
नहींकरनानहींकरनानहींकरनामुहब्बतअब
मुहब्बतभीहैवहशतहीजहाँनिगरानीकरताहै
  - Vikas Shah musafir
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