देख कर तुझको मुझको सुकूँ मिल रहा

  - Vikas Shah musafir
देखकरतुझकोमुझकोसुकूँमिलरहा
हरघड़ीइकनयासाजुनूँमिलरहा
जिनकोमैंसोचताथाकिबे-ग़ैरहैं
उनकीबातोंमेंमुझकोसुकूँमिलरहा
क़द्रअपनीहीकीजबहमनेकभी
ग़ैरकीआँखमेंक्यूँफ़ुजूँमिलरहा
तेरेपहलूमेंहरज़ख़्मभरसेगए
तेरीसोहबतसेजज़्बामज़ूँमिलरहा
अबरस्तेडरातेहैंतनहाईमें
तेरेसाएकाजैसेसहूँमिलरहा
लफ़्ज़कमपड़रहेहैंबयानोंमेंअब
जोतुझीसेमिलाहैफुज़ूँमिलरहा
मैं'मुसाफ़िर'हूँपरमैंठहरतानहीं
हरसफ़रमेंमुझेइकसकूँमिलरहा
  - Vikas Shah musafir
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