बदलते वक़्त में क्या रंग लाया है किनारा

  - Vikas Shah musafir
बदलतेवक़्तमेंक्यारंगलायाहैकिनारा
कोईरहनुमाहैअबकोईराज़दारा
कभीजोचाँदजैसाथावोचेहराबुझगयाहै
उसीचेहरेपेअबतोछागयाहैइकगुबारा
जिन्हेंचाहाउन्हेंहमसेेमोहब्बतहीहोती
हमारेदिलकोलेकिनथाउन्हींकाएतिबारा
हवाएँचीखतीहैंअबदरख़्तोंकीज़बाँमें
येजंगलभीबनाहैअबउदासीकानज़ारा
मिरीतन्हाइयोंनेभीसिखादीहैमोहब्बत
थाकोईजोकरतामुझसेेसच्चादिलगवारा
चलोअबख़त्मकरदेंहमकिताब-ए-दर्दअपनी
इस
मेंकुछबचाहैअबकोईइश्क़-सारा
  - Vikas Shah musafir
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