जब उसकी तस्वीर बनाया करते थे

  - Mukesh Guniwal "MAhir"
जबउसकीतस्वीरबनायाकरतेथे
हमफूलोंकारंगचुरायाकरतेथे
जबभीवोमिलनेकोबुलायाकरताथा
बुद्धीघरपेछोड़केजायाकरतेथे
वोदिनजबवोपासहमारेहोताथा
चाॅंदसितारेयूँँठुकरायाकरतेथे
वोहमकोबसबातोंसेबहलातीथी
औरहममीरकबीरसुनायाकरतेथे
बाक़ीबच्चेयुद्धकेचैप्टरपढ़तेथे
हमख़ुशबूकेदरख़्तउगायाकरतेथे
वोहमकोबीसीडीसमझातीथी
हमभीउसकोइश्क़पढ़ायाकरतेथे
दो-पहरीस्कूलसेलौटाकरतेथे
क़िस्सेजेबमेंभरकरलायाकरतेथे
शामढलेफिरमाॅंकोसाथबिठाकरहम
उनक़िस्सोंसेफ़िल्मबनायाकरतेथे
कईदिनोंतकदुनियासुन्दरलगतीथी
जिसदिनउससेहाथमिलायाकरतेथे
  - Mukesh Guniwal "MAhir"
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