zindagi zindagi nahin lagti | ज़िंदगी ज़िंदगी नहीं लगती

  - Mujtaba Shahroz
ज़िंदगीज़िंदगीनहींलगती
अबकोईशयभलीनहींलगती
जिसकोपानेकीजुस्तजूहैमुझे
हाथबसइकवहीनहींलगती
उसकोअफ़सरपसंदआतेहैं
औरमेरीनौकरीनहींलगती
पहलेलगतीथीख़ूबलगतीथी
आँखअबइकघड़ीनहींलगती
कितनीकलियाँहवसकेनामहुई
आगलेकिनबुझीनहींलगती
इश्क़लगताहैखेलबच्चोंका
दिल-लगीदिल-लगीनहींलगती
क़हक़होंकासबबउदासीहै
तुममुझेमस्खरीनहींलगती
पहलेलगतीथीकुछकमीमुझको
अबकिसीकीकमीनहींलगती
  - Mujtaba Shahroz
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