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MOHSIN JAHANGIR
kaha tha khushi se rahegi
kaha tha khushi se rahegi | कहा था ख़ुशी से रहेगी
- MOHSIN JAHANGIR
कहा
था
ख़ुशी
से
रहेगी
मगर
रो
रही
है
बिछड़
कर
- MOHSIN JAHANGIR
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तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
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Ismail Raaz
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महीनों
तक
रहा
करते
थे
सब
मेहमान
आँखों
में,
मगर
अब
ख़्वाब
भी
आते
नहीं
वीरान
आँखों
में
ज़मान
ए
हिज्र
कहने
को
रिवाज़
ए
इश्क़
ही
तो
है,
मगर
क्या
क्या
नहीं
होता
है
इस
दौरान
आँखों
में
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Darpan
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तू
परिंदा
है
किसी
शाख़
को
घर
कर
लेगा
जो
तेरे
हिज्र
का
मारा
है
किधर
जाएगा
Shadab Javed
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बहन
का
प्यार
जुदाई
से
कम
नहीं
होता
अगर
वो
दूर
भी
जाए
तो
ग़म
नहीं
होता
Unknown
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हिज्र
में
इश्क़
यूँँ
रखा
आबाद
हिचकियांँ
तन्हा
तन्हा
लेते
रहे
Siraj Tonki
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वो
एक
शख़्स
जो
दिखने
में
ठीक-ठाक
सा
था
बिछड़
रहा
था
तो
लगने
लगा
हसीन
बहुत
Siraj Faisal Khan
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जनमदिन
हिज्र
का
कुछ
यूँँ
मनाया
किया
अनब्लॉक
तुमको
आज
हमने
Tanoj Dadhich
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नाम
पे
हम
क़ुर्बान
थे
उस
के
लेकिन
फिर
ये
तौर
हुआ
उस
को
देख
के
रुक
जाना
भी
सब
से
बड़ी
क़ुर्बानी
थी
मुझ
से
बिछड़
कर
भी
वो
लड़की
कितनी
ख़ुश
ख़ुश
रहती
है
उस
लड़की
ने
मुझ
से
बिछड़
कर
मर
जाने
की
ठानी
थी
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Jaun Elia
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क्यूँ
हिज्र
के
सभी
को
क़िस्से
सुना
रहे
हो
ग़म
बेचते
हो
सबको
ग़म
की
दुकान
हो
तुम
Amaan Pathan
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बिछड़
गए
तो
ये
दिल
उम्र
भर
लगेगा
नहीं
लगेगा
लगने
लगा
है
मगर
लगेगा
नहीं
नहीं
लगेगा
उसे
देख
कर
मगर
ख़ुश
है
मैं
ख़ुश
नहीं
हूँ
मगर
देख
कर
लगेगा
नहीं
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Umair Najmi
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तिरे
रुख़्सार
की
लाली
बताती
है
बहुत
ख़ुश
है
बिछड़कर
यार
तू
मुझ
सेे
MOHSIN JAHANGIR
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बहुत
ही
ख़ास
होते
हैं
मुहब्बत
में
जिन्हें
भी
यार
का
दीदार
मिलता
है
MOHSIN JAHANGIR
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रक़ीबों
से
तुझे
इतनी
मुहब्बत
है
बता
हम
ने
तिरा
फिर
क्या
बिगाड़ा
था
MOHSIN JAHANGIR
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साथ
हो
तुम
साथ
मेरे
ज़िन्दगी
की
तरह
चाहते
हो
क्यूँ
मुझे
तुम
अजनबी
की
तरह
MOHSIN JAHANGIR
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मुझे
तुम
सेे
मोहब्बत
अब
नहीं
जानाॅं
तुम्हारी
याद
तक
मुझको
नहीं
आती
MOHSIN JAHANGIR
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