hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Mohit Subran
rakh le kitna bhi alag tu naam apna
rakh le kitna bhi alag tu naam apna | रख ले कितना भी अलग तू नाम अपना
- Mohit Subran
रख
ले
कितना
भी
अलग
तू
नाम
अपना
नाम
ये
भी
धूल
हो
जाना
है
इक
दिन
- Mohit Subran
Download Sher Image
इस
नदी
की
धार
में
ठंडी
हवा
आती
तो
है
नाव
जर्जर
ही
सही,
लहरों
से
टकराती
तो
है
Dushyant Kumar
Send
Download Image
75 Likes
क़सम
देता
है
बच्चों
की,
बहाने
से
बुलाता
है
धुआँ
चिमनी
का
हमको
कारख़ाने
से
बुलाता
है
Munawwar Rana
Send
Download Image
24 Likes
क़फ़स
को
तोड़
के
जब
भी
असीर
निकलेगा
हमारे
खोल
के
अंदर
से
मीर
निकलेगा
धुआँ
है
राख
है
और
ढ़ेर
है
चिताओं
का
यहीं
से
नाचता
गाता
कबीर
निकलेगा
Read Full
Vishnu virat
Send
Download Image
26 Likes
सुखा
ली
सबने
ही
आँखें
हवा
ए
ज़िन्दगी
से
यहाँ
अब
भी
वही
रोना
रुलाना
चल
रहा
है
Farhat Ehsaas
Send
Download Image
33 Likes
आग
अपने
ही
लगा
सकते
हैं
ग़ैर
तो
सिर्फ़
हवा
देते
हैं
Mohammad Alvi
Send
Download Image
36 Likes
मैं
अपनी
हिजरत
का
हाल
लगभग
बता
चुका
था
सभी
को
और
बस
तिरे
मोहल्ले
के
सारे
लड़के
हवा
बनाने
में
लग
गए
थे
Vikram Gaur Vairagi
Send
Download Image
43 Likes
सर्द
रात
है
हवा
भी
सोच
मत
पहन
मुझे
सुब्ह
देख
लेंगे
किस
कलर
की
शाल
लेनी
है
Neeraj Neer
Send
Download Image
36 Likes
तरीक़े
और
भी
हैं
इस
तरह
परखा
नहीं
जाता
चराग़ों
को
हवा
के
सामने
रक्खा
नहीं
जाता
मोहब्बत
फ़ैसला
करती
है
पहले
चंद
लम्हों
में
जहाँ
पर
इश्क़
होता
है
वहाँ
सोचा
नहीं
जाता
Read Full
Abrar Kashif
Send
Download Image
130 Likes
बहुत
सी
कश्तियाँ
डूबी
जहाँ
पर
हवा
की
साजि़शें
गहरी
बहुत
थी
Umesh Maurya
Send
Download Image
0 Likes
कमरे
में
फैलता
रहा
सिगरेट
का
धुआँ
मैं
बंद
खिड़कियों
की
तरफ़
देखता
रहा
Kafeel Aazar Amrohvi
Send
Download Image
29 Likes
Read More
यक-ब-यक
उट्ठा
ज़ेहन
से
पर्दा
और
सब
कुछ
दिखाई
देने
लगा
Mohit Subran
Send
Download Image
0 Likes
तिरे
इस
चाँद
से
माथे
से
फिसला
माँग-टीका
तिरे
लब
को
न
छू
पाई
कभी,
वो
लाली
हूँ
मैं
तिरी
पाज़ेब
से
टूटा
हुआ
बद-बख़्त
घुंघरू
तिरे
ही
कान
की
खोई
हुई
इक
बाली
हूँ
मैं
Read Full
Mohit Subran
Send
Download Image
1 Like
वो
ख़ुदा
क्यूँ
न
हो
प
इक
ख़्वाहिश
हर
किसी
की
अधूरी
रहती
है
Mohit Subran
Send
Download Image
0 Likes
बहुत
मुश्किल
है
मैं
इस
सख़्त-हालत
से
निकल
पाऊँ
बहुत
मुमकिन
है
मैं
शायद
इसी
हालत
में
मर
जाऊँ
Mohit Subran
Send
Download Image
0 Likes
दर्द
सीने
से
मिरे
ऐसे
लगा
रहता
है
दर्द
का
और
न
हम-दर्द
रहा
हो
जैसे
Mohit Subran
Send
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Bimari Shayari
Qismat Shayari
Kiss Shayari
Jawani Shayari
Baarish Shayari